कोरोना वायरस या Covid-19 से आप पूरी दुनिया जूझ रही है। अभी तक किसी को नहीं पता है कि इसका इलाज कब मिलेगा और कब इस बीमारी से मुक्ति मिल पाएगी। मगर, ज्योतिषीय आकलन और तारों-सितारों की भाषा को यदि समझकर देखा जाए, तो ज्योतिर्विदों का मानना है कि 18 सितंबर से इसका इलाज, दवा और महामारी के खात्मे की दिशा में दुनिया आगे बढ़ने लगेगी।

इंदौर के पंडित गिरिश व्यास ने कहा कि कोई भी अप्रत्यक्ष बीमारी, जो दिखाई नहीं देती है, जिसके बारे में शुरुआत में कुछ भी पता नहीं चलता हो और जब पता चले, तब तक उसे काबू करना मुश्किल हो, व राहु के प्रभाव और नक्षत्रों में आती है। अर्थात आर्द्रा नक्षत्र राहु का नक्षत्र कहा गया है और 12 सितंबर 2019 को राहु आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर गए थे। यह वही समय था जब यह बीमारी धीरे-धीरे पैदा हुई और अपने बीच फैलने लगी। अब अकेले राहु यह कार्य या यह बीमारी नहीं दे, सकते जब तक किसी ग्रह का सानिध्य या नक्षत्र का सानिध्य उन्हें प्राप्त न हो।

कुछ ही समय पश्चात अर्थात 19 दिसंबर 2019 को शनि भी अपने नक्षत्र को परिवर्तित करते हुए सूर्य के नक्षत्र में प्रवेश कर गए थे। इस समय जब सूर्य का संबंध राहु से होने से यह बीमारी का प्रत्यक्ष आना सिद्ध करता है अर्थात यह बीमारी चीन में 19 दिसंबर 2019 को सामने आई। इसके पश्चात यह बीमारी यह बीमारी 12 फरवरी 2020 तक सीमित स्थानों पर ही अपना प्रभाव दिखा पा रही थी, जैसे ही केतु का केतु के नक्षत्र में ही प्रवेश हुआ, तब से इसका स्वरूप और बढ़ता ही जा रहा है और यह जो स्वरूप है, जहां जब तक इन तीनों ग्रहों में से कोई भी ग्रह जब तक दूसरे नक्षत्रों में प्रवेश नहीं करेंगे जब तक यह बीमारी बनी ही रहेगी।

ज्योतिषी तर्क पर हम देखें तो 10 मई 2020 को सूर्य ने सूर्य के नक्षत्र में जैसे ही प्रवेश किया, भारत के कुछ स्थानों में सही मार्ग में कार्य होने लगा। वहीं, 20 मई 2020 को राहु का राहु के नक्षत्र से निकलकर मंगल के नक्षत्र में प्रवेश करने के बाद संसार की बड़ी से बड़ी शक्तियां फिर से ताकतवर बनेंगी तथा इस बीमारी से लड़ने में सही मार्ग में काम करने लगेंगी। अर्थात इस महामारी की दवा और वैक्सीन पर चल रहे काम में तेजी आएगी और उनका विकास होगा।

यहां अभी तक यह सिद्ध नहीं होगा कि बीमारी 20 मई से ठीक होगी या नहीं, लेकिन 20 मई 2020 से सही दिशा में बीमारी की दवाई पर बनाने और महामारी से मुक्ति की दिशा में काम होने लगेगा। 18 सितंबर तक जैसे ही केतु स्वंय अपने नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, तो इस बीमारी के इलाज को ढूंढ़ा जा सकेगा। शास्त्रों में तो यह भी वर्णन है कि इस बीमारी का इलाज जब भी राहु मंगल के नक्षत्र में जाता है, तब मिलता है। इसके बाद ही भारत और पूरा विश्व पहले की तरह सामान्य होने की तरफ लौट आएंगे।

वापस वुहान पहुंच जाएगा कोरोना

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एस्ट्रोलॉजर्स सोसाइटी (AIFAS) के कानपुर चैप्टर के असिस्टेंट प्रोफेसर शील गुप्ता ने बताया कि 22 मई को राहु अपना नक्षत्र परिवर्तन कर रहे है और मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे जो मंगल का नक्षत्र है। उस समय कर्क लग्न उदय हो रही है अतः ठीक उसी समय के चार्ट के अनुसार यदि आने वाले समय की घटनाओं का अनुमान लगाया जाए, तो उस समय राहु बारहवे भाव में बैठा है, जो अस्पताल का भी कारक माना जाता है।

मंगल का सम्बंध पंचम भाव से हो रहा है अतः उसके बाद कोई न कोई उपचार विधि विकसित हो जाएगी कोरोना के विरुद्ध जंग में विजय दिलाएगी। मगर, कोरोना नष्ट नहीं होगा, अब वो हमारे जीवन का हिस्सा बनकर रहेगा। बस उपचार उपलब्ध हो जाएगा, जिससे उतना भय का वातावरण नहीं रहेगा। शनि के वक्री होने पर कोरोना वहीं पहुंच जाएगा, जहां से आया यानी वुहान अब ऐसी खबर भी आने ही लगी हैं कि वहां कोरोना के मामले एक बार फिर से सामने आ रहे हैं।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
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