रायपुर। यदि अच्छा जीवनसाथी चाहिए जो जिंदगी भर सुख दुख में साथ निभाए और हंसी खुशी से जीवन गुजरे तो गणगौर की पूजा करनी चाहिए। गणगौर यानी शिव-पार्वती की पूजा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। सुहागिनें भी व्रत करके पूजन करें तो परिवार में सुख-समृद्धि और अखंड सुहाग का आशीर्वाद मिलता है।

होली की राख से बनाए 16 पिंड

होलिका दहन के दूसरे दिन युवतियों ने होली की राख से 16 पिंड बनाये और गणगौर पूजा की शुरुआत की। चैत्र शुक्ल तृतीया तक प्रतिदिन सुबह-शाम पूजन का सिलसिला चलेगा। राजस्थानी संस्कृति के अनुरुप चैत्र माह की शुरुआत से गणगौर पूजा का सिलसिला शुरू होता है जो लगातार 18 दिनों तक चलता है। अंतिम दिन भव्य रूप से शोभायात्रा निकालकर गणगौर को विदाई दी जाती है। गणगौर पूजा का शुभारंभ चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि से यानी होली के दिन से शुरू हुआ। कुंवारी कन्याओं ने अपने लिए योग्य जीवनसाथी पाने और सुहागिनों ने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए गणगौर की पूजा की।

अंतिम दिन गणगौर का पारणा करेंगी

'ईसर-गौर' (शिव-पार्वती) को पूजने यह सिलसिला लगातार 18 दिनों तक सुबह-शाम चलेगा। राजस्थानी संस्कृति को मानने वाली महिलाओं ने घर-घर में गणगौर की प्रतिमा की स्थापना करके पूजा की। अंतिम दिन महिलाएं गणगौर का पारणा करेंगी। 16 जोड़ों को भोजन करवाकर अखंड सुहाग के प्रतीक स्वरूप 16 सौंदर्य सामग्री उपहार में देंगी।

अनेक समाज के लोग पूजा-अर्चना में रमे

गणगौर की पूजा-अर्चना में माहेश्वरी समाज, गौड़ ब्राह्मण समाज, पुष्करणा ब्राह्मण समाज, राजस्थानी सोनी समाज, शाकद्वीपिय ब्राह्मण समाज, अग्रवाल समाज समेत अनेक समाज की महिलाएं पूजा-अर्चना में जुटी हैं।

कई जगह से निकलेगी शोभायात्रा

चैत्र शुक्ल तृतीया पर राजधानी के कई इलाकों से गणगौर पर्व की शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा ईशर-गौरा की प्रतिमा का आकर्षक श्रृंगार कर बाजे-गाजे के साथ निकाली जाएगी। सत्तीबाजार के अंबा मंदिर, बूढ़ापारा के बूढ़ेश्वर मंदिर, फाफाडीह के राम-सा-पीर मंदिर और कचना रोड स्थित सुरेश्वर महादेव पीठ से शोभायात्रा धूमधाम से निकाली जाएगी।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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