Adhik Maas 2020 हिंदू धर्म में जहां अधिकमास का विशेष महत्व है, वहीं ज्योतिष शास्त्र के लिहाज से भी इसे काफी विशेष माना जाता है। इस वर्ष जो अधिकमास आने वाला है, उसे काफी शुभ माना जा रहा है। ज्योतिष विद्वानों का मानना है कि ऐसा शुभ संयोग पुरुषोत्तम मास 160 वर्ष बाद बन रहा है और इसके बाद ऐसा शुभ मलमास 2039 में आएगा। आइए जानते हैं इसे मलमाल या अधिकमास क्यों कहा जाता है। इसका क्या धार्मिक महत्व है और भगवान राम के नाम पर इसे पुरुषोत्तम मास क्यों कहा जाता है।

3 साल में एक बार आता है अधिकमास

जब धरती के घूमने के कारण दो वर्षों के बीच करीब 11 दिनों का फासला हो जाता है तो तीन साल में करीब एक महीन के बराबर का अंत आ जाता है। इसी अंतर के कारण हर तीन साल में एक चंद्र मास आता है। हर तीन साल में बढ़ने वाले इस माह को ही अधिकमास या मलमास कहा जाता है। भारतीय हिंदू कैलेंडर मे सूर्य और चंद्र की गणनाओं के आधार पर चलता है। अधिकमास दरअसल चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घंटे के अंतर से आता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार हर सूर्य वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का माना जाता है। वहीं चंद्र वर्ष 365 दिनों का माना जाता है। यानी दोनों में करीब 11 दिनों का अंतर होता है, जो तीन वर्ष में एक माह के लगभग हो जाता है। इसी कारण इसे अधिकमास कहा जाता है।

शुभ नहीं माना जाता है मलमास

हिंदू धर्म के मुताबिक अधिकमास को पवित्र कार्य के लिहाज से शुभ नहीं माना जाता है। अतिरिक्त माह होने के कारण इसे मलिन मास भी कहा जाता है। हिंदू धर्म के विशिष्ट संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवित, विवाह और अन्य सामान्य धार्मिक संस्कार अधिकमास में नहीं किए जाते हैं। मलिनमास होने के कारण ही इसका नाम मलमास पड़ा है।

भगवान राम के नाम पर पड़ा नाम 'पुरुषोत्तम मास'

धार्मिक मान्यता है कि अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु हैं और पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है, इसलिए अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। पुराणों में इस मास को लेकर कई धार्मिक रोचक कथाएं भी दी गई है।

ये संस्कार किए जा सकते हैं अधिकमास में

यूं तो अधिकमास में कई संस्कार का आयोजन वर्जित होता है, लेकिन कुछ ऐसे संस्कार है जिनको मलमास के दौरान भी संपन्न कराया जा सकता है। संतान जन्म के कृत्य जैसे गर्भाधान, पुंसवन, सीमंत आदि संस्कार किए जा सकते हैं। इसके अलावा यदि किसी मांगलिक कार्य की शुरुआत की जा चुकी है और मलमास आ जाता है तो भी उस मांगलिक कार्य को पूरा किया जा सकता है। इस दौरान विवाह नहीं हो सकता है लेकिन युवक-युवतियों के रिश्ते देखे जा सकते हैं।

Posted By: Sandeep Chourey

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