पटना [जेएनएन]। इस सावन में चारों सोमवार बहुत ही विशेष होंगे। आचार्य विनोद झा वैदिक ने कहा कि चारों दिन शुभ बन रहे हैं। सावन का आगमन प्रतिपदा तिथि और उत्तर आषाढ़ नक्षत्र में 20 जुलाई को हुआ।

वैदिक ने कहा कि 50 वर्ष बाद इस प्रकार का संयोग बना है, जिसमें रोजगार, आय, ज्ञान और कृषि क्षेत्र में वृद्धि की बात है। इसके अलावा बीमारियों से छुटकारा दिलाने और कई ग्रह परिवर्तन होने वाला है।

सावन के सोमवार

पहला सोमवार : 25 जुलाई को है और यह धृति योग में आएगा। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी कुछ समय तक रहेगा। माना जाता है कि इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

दूसरा सोमवार : दूसरा सोमवार एक अगस्त को वज योग में पड़ रहा है। इस दिन भी सर्वार्थ सिद्धि योग है। इस दोनों योगों के कारण सावन का दूसरा सोमवार विशेष फलदायक बन गया है। इस संयोग में शिव स्तुति करने से शक्ति मिलती है और स्वास्थ्य ठीक रहता है।

तीसरा सोमवार : तीसरा सोमवार आठ अगस्त को साद्य योग में आएगा। इस योग को साधना और भक्ति के लिए उत्तम माना गया है। इस दिन शिव की पूजा करने से कठिन से कठिन काम भी पूर्ण होगा।

चौथा सोमवार : चौथा सोमवार 15 अगस्त को आयुष्मान योग में होगा। यह सोमवार प्रदोष व्रत को साथ लेकर आ रहा है। प्रदोष व्रत भी भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन शिव की अराधना करने वाले जातकों की आयु में वृद्धि होती है। आर्थिक परेशानियों में कमी आती है तथा जीवन पर आने वाले संकट से भगवान शिव रक्षा करते हैं।

ये दिन भी हैं फलदायी

इसके अलावा 31 जुलाई, एक अगस्त और दो अगस्त का दिन विशेष शुभ फलदायी है। 31 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत और त्रयोदशी है, वहीं एक अगस्त को सोमवार और शिव रात्रि पूजा एवं दो अगस्त को भौमवती आमावस्या होने से शिव की पूजा फलदायी है।

मनोवांछित फल की होती है प्राप्ति

माता पार्वती ने पति रूप में भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए सबसे पहले यह व्रत को किया था। सोमवार के व्रत का शिव की आराधना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिये विशेष महत्व है। सौभाग्यवती स्त्रियां पति की लम्बी आयु, संतान रक्षा के साथ अपने भाई की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करती है। पुरूष इस व्रत का पालन संतान, धन-धान्य और प्रतिष्ठा के लिए करते हैं। सोमवार व्रत का नियमित रूप से पालन करने से भगवान शिव और देवी पार्वती की अनुकंपा बनी रहती है।

पढ़ें: ये 5 उपाय आजमाएं, तुरंत नौकरी पाएं

बेलपत्र और धतूर से होंगे शिव प्रसन्न

सावन में भगवान भोलेनाथ की पूजा दूध, दही, घी, शक्कर, गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूर, दूब, श्रीफल आदि से करनी चाहिए। इससे पुण्य फलों में वृद्धि होती है। इस दौरान रुद्राभिषेक, शिवपुराण, शिव स्त्रोत का पाठ करना भी लाभकारी है।

धर्म से जुडी ख़बरों के लिए डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप

Posted By:

fantasy cricket
fantasy cricket