मल्टीमीडिया डेस्क। कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि आंवला नवमी के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के अतिप्रिय वृक्ष आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। शास्त्रों में आंवला नवमी का वही महत्व है जो वैशाख मास की अक्षय तृतीया तिथि का होता है। मान्यता है कि आंवला नवमी को द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था। यह भी कहा जाता है कि आज के दिन भगवान श्रीहरी ने कुष्माण्डक दैत्य का वध किया था और उसके रोम से कुष्माण्ड बेल की उत्पत्ति हुई थी। इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा के अलावा कुष्माण्ड का दान करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। इस दिन तुलसी विवाह का भी प्रावधान है। आंवला नवमी को तुलसी विवाह करने से कन्यादान का फल प्राप्त होता है।

आंवला नवमी की कथा

प्राचीनकाल में काशी नगर में एक व्यापारी अपनी पत्नी के साथ रहता था। इस दंपत्ति को कोई संतान नहीं थी, इस वजह से कारोबारी की धर्मपत्नी दुखी और उदास रहती थी साथ ही उसका स्वभाव भी काफी खराब हो गया था। एक दिन उसको किसी व्यक्ति ने बोला कि वह यदि वह किसी बच्चे की बलि भैरव बाबा को चढ़ा दें तो उसको संतान की प्राप्ति होगी। व्यापारी का पत्नी ने अपनी इस इच्छा और इस बलि के संबंध में अपने पति को बताया तो उसने इस तरह के काम से साफ मना कर दिया, लेकिन उसकी पत्नी किसी भी हाल में संतान को चाहती थी। इसलिए उसने अपने पति की बात को अनसुना कर उसने एक बच्चे की बलि भैरव महाराज को चढ़ा दी। बच्चे की बलि चढ़ाने से व्यापारी की पत्नी को कई रोगों ने घेर लिया। पत्नी की यह हालत देखकर कारोबारी काफी दुखी हुआ।

व्यापारी ने जब अपनी पत्नी ने इन रोगों की वजह पूछी को पत्नी ने संतान प्राप्ति के लिए बच्चे की बलि देने की बात कही। यह सुनकर कारोबारी को काफी गुस्सा आया और उसने क्रोधवश अपनी पत्नी को काफी भला-बुरा कहा और उसकी पिटाई कर दी। साथ ही अपनी पत्नी की यह हालत देखकर उसको दुख भी हुआ और दया भी आई। तब उसने अपनी पत्नी को सलाह दी की वह अपने पाप का प्रायश्चित्त करने के लिए गंगा स्नान करे और पाप से मुक्ति की प्रार्थना करें। अपने पति के कहने पर वह गंगा के तट पर गई कई दिनों तक गंगा स्नान कर पाप से मुक्त होने की प्रार्थना करती रही।

कारोबारी की पत्नी की पूजा और आस्था से प्रसन्न होकर मां गंगा एक वृद्धा के रूप में प्रगट हुई और उसको दर्शन देते हुए कहा कि वह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को वृंदावन में आंवला नवमी का व्रत रखकर आंवले के वृक्ष का पूजन करे तो उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। मां गंगा के कहने पर उसने ऐसा ही किया, जिससे व्यापारी की पत्नी के सारे कष्ट दूर हो गए और उसको एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

Posted By: Yogendra Sharma

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