आंवला नवमी 2020: कार्तिक मास के सोमवार को अक्षय आंवला नवमी मनाई जा रही है। आंवला नवमी के दिन विशेष तौर पर आंवले के पेड़, भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का विधान है। इस दिन आमले के पेड़ की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। आंवला वृक्ष साक्षात विष्णु का ही स्वरूप है। यह विष्णु प्रिय है और इसके स्मरण से ही गोदान के बराबर फल मिलता है। आंवले के पेड़ के नीचे श्रीहरि विष्णु के दामोदर स्वरूप की पूजा की जाती है। अक्षय नवमी की पूजा संतान प्राप्ति एवं सुख, समृद्धि एवं कई जन्मों तक पुण्य क्षय न होने की कामना से किया जाता है। इस दिन अमला के पेड़ को घर मे लगाया जाता है। आंवले के पेड़ के नीचले भाग में ब्रह्मा जी, बीच मे भगवान विष्णु जी और ताने में भगवान शिव का वास मन गया है।

इसे पूर्व या उत्तर दिशा में लगाया जाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रवेश होता है। यदि आमले का पेड़ न मिले तो आंवले के पेड़ की टहनी लेकर भी पूजा की जा सकती है। आंवला नवमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके आंवले के पेड़ की जड़ में दूध, रोली, अक्षत, फूल, गंध चढ़ाए। फिर आंवले के पेड़ की कम से कम सात बार और अधिक से अधिक 108 बार परिक्रमा करें और दीये जलाएं। इसके बाद कथा पढ़ें। इस दिन अगर आप किसी वजह से आंवले के पेड़ की पूजा या उसके नीचे बैठकर भोजन ग्रहण नहीं कर पाएं तो इस दिन आंवला जरूर खाएं।

आंवले के पेड़ की पूजा करने के एक कारण यह भी है कि आंवला स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी होता है। विभिन्न रूपों में इसका सेवन बीमारियों को दूर करता है। घर में आंवले का पेड़ होने से सकारात्मकता बनी रहती है।

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Posted By: Arvind Dubey

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