भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। इस बार बसंत पंचमी तिथि पर मां सरस्वती की पूजा के लिए दुर्लभ चार शुभ योग बन रहे हैं। शिव योग, सिद्ध योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग। ये चारों योग बहुत ही शुभ योग होते हैं। बसंत पंचमी पर्व पर शब्द, स्वरों, ज्ञान की देवी मां सरस्वती के पूजन का महत्व है। संपूर्ण जनमानस व प्रकृति के नवनिर्माण की इस ऋतु में उत्तरायण ग्रह परिवर्तन के साथ ऋतु परिवर्तन होता है।

शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी तिथि 25 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर 26 जनवरी को सुबह 10:28 तक रहेगी। उदयातिथि के हिसाब से बसंत पंचमी 26 जनवरी को मनाई जाएगी। देवी सरस्वती की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कल सुबह 07 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12:34 तक रहेगा।

पूजा विधि

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीले वस्त्र धारण करें तो उत्तम है। मां सरस्वती की प्रतिमा को पीले रंग के कपड़े पर स्थापित करें। उनकी पूजा में रोली, मौली, हल्दी, केसर, अक्षत, पीले या सफेद रंग का फूल, पीली मिठाई आदि चीजों का प्रयोग करें। इसके बाद मां सरस्वती की वंदना करें और पूजा के स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबों को रखें। बच्चों को पूजा स्थल पर बैठाएं। इस दिन से बसंत का आगमन हो जाता है, इसलिए देवी को गुलाब अर्पित करना चाहिए। मां सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादिनी और वाग्देवी जैसे अनेक नामों से भी पूजा जाता है।

दूर होंगी वैवाहिक जीवन की समस्याएं

बसंत पंचमी के दिन भगवान कामदेव और माता रति की भी पूजा की जाती है। बसंत पंचमी के दिन जल्दी स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ मां सरस्वती की आराधना करें। कहा जाता है भगवान कामदेव और माता रति की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याएं दूर हो जाती हैं।

पीले रंग का महत्व

हर दृष्टि में सभी ऋतुओं में वसंत ऋतु श्रेष्ठ है। भगवान श्रीकृष्ण को भी वसंत ऋतु अधिक प्रिय है। पीला रंग सकारात्मकता देह में स्फूर्ति समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व बताया गया है। इस पर्व को कई स्थानों पर ऋषि पंचमी के नाम से भी जाना जाता है।

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Posted By: Ravindra Soni

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