शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि को भड़ली नवमी पर्व मनाया जाता है। इसी दिन आषाढ़ी गुप्त नवरात्रि का समापन भी होता है। कई मायनों में इस दिन को खास माना जाता है। बता दें कि, इस वर्ष भड़ली नवमी 10 जुलाई दिन बुधवार को है। देवशयनी एकादशी से पहले भड़ली नवमी को विवाह के लिए सबसे शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह दिन विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। इस दिन विवाह करने के लिए पंचांग देखने की भी आश्यकता नहीं होती है।

हिंदू शास्त्रीय पंचांग के अनुसार साल में अनेक अबूझ मुहूर्त आते हैं। कहते हैं कि इन अबूझ मुहूर्त में किसी शुभ कार्य को करने से पहले पंचांग शुद्धि देखने की जरूरत नहीं पड़ती। इन अबूझ मुहूर्त में वसंत पंचमी, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की दूज, फुलेरा दूज, राम नवमी, जानकी नवमी, वैशाख पूर्णिमा, गंगा दशमी, भड़ली नवमी, अक्षय तृतीया, विजयादशमी शामिल हैं। भड़ली नवमी महत्वपूर्ण इसलिए शुभ मानी गई है क्योंकि इसके दो दिन बाद देवशयनी एकादशी से चार माह के लिए शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है।

बता दें कि, भड़ली नवमी के दिन भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा का विधान है। कई भक्त इस दिन व्रत रखकर शाम के समय भगवान लक्ष्मी नारायण की पूजा करते हैं और मनोकामना पूर्ति के लिए मन्नत मांगते हैं। यह पूजा सत्यनारायण भगवान की पूजा की तरह ही होती है। इस दिन परिवार, मित्रों आदि बंधु-बांधवों को बुलाकर लक्ष्मी नारायण की पूजा की जाती है और कथा पढ़ी जाती है। कई लोग इस खास आयोजन के बाद प्रसाद वितरण करते हैं, जबकि कई लोग सामूहिक भोज भी कराते हैं।