मल्टीमीडिया डेस्क। सनातन संस्कृति के पंचांग में सभी तिथियां देवी-देवताओं को समर्पित है और उनका अलग-अलग महत्व है। इन तिथियों में कुछ तिथियों का खास महत्व है और इन तिथियों पर व्रत, उपवास और आराधना करने से मानव की सभी कामनाएं पूरी होती है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण तिथि पू्र्णिमा है।

पंचांग में तिथियों का निर्धारण चंद्रमा की चढ़ती- उतरती कलाओं के आधार पर किया गया है। पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा अपने पूरे आकार में दिखाई देता है, जबकि अमावस्या को चंद्रमा दिखाई नहीं देता है। चंद्र दर्शन से पूर्णिमा तक के पूरे समय को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। इस तिथि की एक विशेषता यह भी है कि इस दिन माह की समाप्ति भी होती है।

ज्योतिष और विज्ञान दोनों में इस तिथि का खास महत्व बताया गया है। इस दिन चंद्रमा अपना पूरा प्रभाव लिए होता है इसलिए मानव मन पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इस तिथि को समुद्र में ज्वारभाटा आता है। पानी चंद्रमा के आकर्षण में खींचा चला जाता है। मानव शरीर 70 प्रतिशत से ज्यादा पानी से बना हुआ है इसलिए मानव स्वभाव में इस दिन परिवर्तन देखा जाता है। चंद्रमा के प्रभाव से शरीर के अंदर रक्‍त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक हो जाता है।

एक साल में बारह मास होते हैं और इस तरह से एक साल में बारह पूर्णिमा होती है। साल की सभी पूर्णिमा को भक्त व्रत रखते हैं और इन सभी पर कोई महत्वपूर्ण व्रत, त्यौहार और पर्व मनाया जाता है। अब बात करते हैं साल में आने वाली पूर्णिमा और उस दिन आने वाले खास पर्वों पर।

पूर्णिमा पर आने वाले पर्व

चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाता है।

वैशाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती मनाई जाती है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वट सावित्री उत्सव मनाया जाता है।

आषाढ़ पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा का त्यौहार मनाया जाता हैं।

श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षाबन्धन का पर्व मनाया जाता है।

भाद्रपद पूर्णिमा को उमा माहेश्वर व्रत मनाया जाता है।

अश्विन पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा का उत्सव मनाया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा को पुष्कर मेला लगता है और गुरुनानक जयंती मनाई जाती हैं।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन श्री दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है।

पौष पूर्णिमा को शाकंभरी जयंती मनाई जाती है। इस दिन बनारस में दशाश्वमेध तथा प्रयाग में त्रिवेणी संगम पर स्नान का खास महत्व है।

माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती और श्री भैरव जयंती मनाई जाती है।

फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होली का पर्व मनाया जाता है।