मथुरा। भक्ति आंदोलन के प्रणेता चैतन्य महाप्रभु की चरणपादुका एक बार फिर से सोमवार को वृंदावन पहुंचीं। भक्तों ने हरिनाम संकीर्तन के साथ चरणपादुका का स्वागत किया। इस अवसर पर चंद्रोदय मंदिर के प्रवेश द्वार पर ढोल बजे और पुष्प वर्षा हुई। चंद्रोदय मंदिर में चरणपादुका को पालकी में विराजित किया गया। चैतन्य महाप्रभु वृंदावन भ्रमण के लिए 504 साल पहले आए थे। छटीकरा मार्ग स्थित वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में चैतन्य महाप्रभु की दिव्य चरण पादुका सोमवार शाम को साढ़े पांच बजे रॉल्स रॉयस कार के द्वारा पहुंचीं। संस्था के प्रमुख मधु पंडित दास ने चरण पादुका का पूजा कर स्वागत किया। इसके बाद गौड़ीय वैष्णव संतों ने हरिनाम संकीर्तन कर महाप्रभु की चरणप्रादुका को पालकी में विराजित किया। यहां पर चरणपादुका का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पंचगव्य व पंचामृत से महाभिषेक किया गया। भक्तों ने दामोदराष्टकम का गायन कर चैतन्य महाप्रभु के विग्रह के समक्ष दीपदान किया।

संस्था प्रमुख मधु पंडित दास ने इस अवसर पर कहा कि यह दिव्य पादुका नवद्वीप (पश्चिम बंगाल) के धामेश्वर मंदिर में निवास करती है। यह चैतन्य महाप्रभु की मूल पादुका है।उन्होंने कहा कि चैतन्य महाप्रभु ने संन्यास लेने से पहले अपनी पत्नी विष्णुप्रिया देवी को यह पादुका भेंट की थी। जिनकी आजीवन सेवा विष्णुप्रिया देवी के द्वारा की गई। धामेश्वर महाप्रभु मंदिर में पादुका का प्रतिदिन पूजन होता है। चैतन्य महाप्रभु के चरण पादुकोत्सव में मंगलवार सुबह 11 बजे वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में चरण-पादुका का पुष्पाभिषेक किया जाएगा और इसके बाद शाम 4.30 बजे स्वर्ण रथयात्रा शुरू होगी। स्वर्ण रथयात्रा में बड़ी संख्या में भक्त शामिल होंगे।

Posted By: Yogendra Sharma

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