Chaiti Chhath 2020: सनातन संस्कृति में सूर्य आराधना का विशेष महत्व है। नवग्रहों में सूर्य देव को राजा का पद दिया गया है। इसका मतलब यह है कि वह वह सृष्टि के पालनहार है और ब्रहमाण्ड की अपनी प्रजा का ख्याल रखते हैं। सूर्य अपनी रश्मियों से धरती पर प्रकाश बिखेरते हैं और सूर्य के इसी प्रकाश की वजह से पृथ्वीलोक पर जीवन संभव हुआ है। इसलिए सूर्यदेव को जीवनदाता माना जाता है। इसलिए सूर्यदेव का आभार जताने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए छठ का पर्व मनाया जाता है।

वर्ष में दो बार मनाया जाता है छठ

छठ का पर्व एक साल में दो बार मनाया जाता है। यह त्यौहार कार्तिक शुक्ल षष्ठी और चैत्र शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। इन दोनों तिथियों पर सूर्यदेव की विधि विधान से उपासना की जाती है। मुख्यत: यह पूर्वांचल का पर्व है और इस इलाके के रहने वाले लोग इस पर्व को महोत्सव के रूप में मनाते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और इससे लगे हुए बंगाल, ओडिशा और दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में जहां पर पूर्वांचल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं, वहां पर भी छठ पर्व मनाया जाता है।

चार दिन चलता है छठ पर्व

कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन इस पर्व की ज्यादा धूम रहती है और लोग बड़ी संख्या में समुद्र, नदी, तालाब और पवित्र जल सरोवरों के तट पर इकट्ठे होते हैं और सूर्य को अर्घ्य देते हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, छठी माई, छठ, डाला छठ, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी के नामों से जाना जाता है। इसी तरह से चैत्र शुक्ल षष्ठी पर भी इस पर्व को मनाया जाता है और छठ के अवसर पर की जाने वाली सभी परंपराओं को निभाया जाता है। छठ का पर्व नहाय खाय से प्रारंभ होता है। दूसरे दिन खरना किया जाता है। तीसरे दिन अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। चौथे और अंतिम दिन उदित होते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस पर्व को समापन हो जाता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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