Coronavirus Impact on Chaiti Chhath 2020: देश के बड़े हिस्से खासकर पूर्वांचल में इन दिनों चैती छठ का पर्व मनाया जा रहा है। वैसे तो इस पर्व की धूम समुद्र, नदियों और सरोवरों के किनारों पर रहती है, लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से इस त्यौहार को श्रद्धालु घर बैठकर मना रहे हैं। छठ महोत्सव के चौथे दिन मंगलवार 31 मार्च को उदित होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और इसके सात ही इस पर्व का समापन हो जाएगा। शास्त्रों में उदित होते सूर्य को अर्घ्य देने का बड़ा महत्व है। इसके लिए आप लॉकडाउन और कर्फ्यू की स्थिति में अपने घर बैठकर सूर्यदेव को अर्घ्य दे सकते हैं। सूर्य के उदय होने के साथ ही आप अपने घर से किसी स्वच्छ जगह पर खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभा सकते हैं।

शास्त्रोक्त मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देने से सभी तरह के कष्टों का नाश होता है और यश, कीर्ति के साथ समृद्धि प्राप्त होती है। धरती से सभी प्राणियों को सूर्यदेव के साक्षात दर्शन होते हैं और सूर्य सभी प्रणियों के जीवन का आधार भी है। सूर्यदेव की आराधना से मानव को सभी रोगों से मुक्ति मिलती है। सूर्योदय के समय सूर्य को जल चढ़ाने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। सूर्य की रोशनी से हमको विटामिन डी मिलता है, जो हमारे शरीर के आवश्यक तत्वों में से एक है। सूर्य को अर्घ्य तांबे के पात्र में जल भरकर देना चाहिए। जल में कुमकुम, अक्षत, रक्तवर्णी गुड़हल के फूल या कनेर के फूल उसमें डालकर सूर्य को अर्घ्य दिया जा सकता है।

छठ पूजा की सामग्री

छठ पूजा के लिए कुछ विशेष वस्तुओं की जरूरत होती है, जो सामान्यत: छठ व्रती के घरों में मिल जाती है। इन उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग कर आप सूर्य को अर्घ्य देकर छठ व्रत का समापन कर सकते हैं। सूप और बांस की टोकरी छठ पूजा का अहम हिस्सा है। बांस की टोकरी में पूजा की सारी सामग्री को भरकर पूजास्थल पर ले जाते हैं। उसके बाद सूप में भरकर पूजा सामग्री को सूर्यदेव को समर्पित किया जाता है। सूर्य को भोग लगाने के लिए गुड़ और गेंहू के आटे से ठेकुआ बनाया जाता है। इसके साथ ही फल सूर्यदेव को समर्पित किए जाते है। सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर उनसे आरोग्य, यश और समृद्धि की कामना की जाती है। इस तरह उदिय होते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चैती छठ के पर्व का समापन हो जाता है।

यदि कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है तो उस सामग्री को आप मन से समर्पित कर सकते हैं। सूर्यदेव को आप एक तांबे लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, कुमकुम, अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं। ये सभी पूजन सामग्री घरों में आसानी से उपलब्ध होती है।

Posted By: Yogendra Sharma

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