चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ ही 25 मार्च 2020 को हिंदू नव-वर्ष की शुरुआत हो गई है। बुधवार को बासंतिक नवरात्र की शुरुआत घट स्थापना के साथ घरों में होगी। 25 मार्च को प्रतिपदा तिथि दिन में 3:50 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वितीया तिथि लगेगी। अतः प्रतिपदा तिथि में ही कलश स्थापना किया जाएगा।

घट स्थापना सूर्योदय से दिन में 3:50 मिनट तक की जा सकती है। इस दिन रेवती नक्षत्र सूर्योदय से रात तक रहेगा।ब्रह्म योग सूर्योदय से दिन में 2:40 बजे तक। सूर्योदय से सुबह 9 बजे तक लाभ एवं अमृत का चौघड़िया है और स्थिर लग्न सुबह 08:40 से 10:30 तक रहेगा। इस प्रकार स्थिर लग्न एवं अमृत चौघड़िया सुबह 08:40 से 9 बजे तक अत्यंत शुभ मुहूर्त्त है।

अभिजीत मुहूर्त्त दिन में 11:35 से 12:23 बजे तक घट स्थापना की जा सकती है। परंतु राहु काल 12 बजे से 1:30 बजे तक होने की वजह से दूसरा शुभ मुहूर्त्त दिन में 11:35 से 12 बजे तक होगा। नवरात्र से सम्बंधित सभी यज्ञ, हवन कन्या पूजा आदि रामनवमी 2 अप्रैल दिन गुरुवार को किया जाएगा। नवरात्र का पारण 3 अप्रैल दिन शुक्रवार को किया जाएगा।

ऐसे करें घट स्थापना

कलश स्थापना के लिए आप मिट्टी या धातु का कलश के साथ ही स्वच्छ मिट्टी, थाली, कटोरी, जल, ताम्र कलश, मिट्टी का पात्र, दूर्वा, इत्र, चन्दन, चौकी, लाल वस्त्र, रुई, नारियल, चावल, सुपारी, रोली, मौली, जौ, धूप, दीप, फूल, नैवेद्य, अबीर, गुलाल, केसर, सिंदूर, लौंग, इलायची, पान, शक्कर, शुद्ध घी, वस्त्र, आभूषण, यज्ञोपवीत, दूध, दही, गंगाजल, शहद आदि सामग्री एकत्र कर लें।

कलश स्थापना के लिए एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित कर दें। इसके बाद मां दुर्गा के बाईं ओर सफेद वस्त्र पर 9 कोष्ठक नौ ग्रह के लिए बनाएं और लाल वस्त्र पर 16 कोष्ठक षौडशामृत के लिए बना लें। इसके बाद कलश के गले में मौली या रक्षा सूत्र बांधें और उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं।

उस कलश की स्थापना करें और पेंदी के पास गेहूं त​था चावल रख दें। फिर कलश में जल भरें तथा आम की पत्तियां डाल दें। इसके बाद एक मिट्टी के पात्र में चावल लें और उस पर नारियल के गोले में रक्षा सूत्र लपेट कर रखें। उस पात्र को कलश के मुख पर रख दें। अब एक अखंड दीपक जलाकर वहां रखें। इसके अलावा मिट्टी के पात्र में जौ को मिट्टी के साथ भर लें और उसे जल डालें। अब उस पात्र को चौकी के बाईं ओर स्थापित करें।

ये मंत्र पढ़ें :

"ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।"

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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