Chaitra Navratri 2020: मां दुर्गा को प्रसन्न करने के अनेक उपाय शास्त्रों में दिए गए हैं। देवी के उपासना के लिए भक्त उपवास रखते हैं, देवी प्रतिमा की स्थापना करते हैं, जवारे बोते हैं और माता को प्रसन्न करने के लिए अखंड दीपक जलाते हैं। देवी की उपासना का एक ऐसा ही शास्त्रोक्त उपाय दुर्गा सप्तशती का पाठ है जिसको भक्त भक्तिभाव के साथ कर माता की कृपा प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से भक्तों के सभी दैहिक, दैविक और भौतिक सभी ताप और संताप का हरण होता है और माता की कृपा से सुख समृद्धि के साथ विपुल धन की प्राप्ति होती है।

दुर्गा सप्तशती से होता है दुखों का नाश

दुर्गा सप्तशती का पाठ सभी तरह के दुखों का नाश करने वाला है इसलिए नवरात्र के दिनों में इसको विशेष रूप से किया जाता है। लेकिन इसके पाठ को करने में भक्तों को कुछ विशेष सावधानियां रखना पड़ती है। नहीं तो इसके पाठ का फल भक्त को प्राप्त नहीं होता है। दुर्गा सप्तशती के पाठ का उच्चारण बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए और इसके साथ एक लय में शास्त्रोक्त स्वरों के साथ होना चाहिए। पाठ को संस्कृत में करना उत्तम फलदायी होता है। पढ़ने में दिक्कत हो तो हिन्दी में भी किया जा सकता है। पाठ करते समय स्वच्छता का ख्याल रखें। पैरों का स्पर्श हाथ से न हो। यदि ऐसा हो तब हाथ को जल से धोकर फिर पाठ करें।

कुश या ऊन का आसन करें इस्तेमाल

दुर्गा सप्तशती के पाठ में आसन का विशेष ख्याल रखें। बैठने के लिए कुश या ऊन का आसन प्रयोग करें। ऊन का लाल रंग का आसन प्रयोग करें। यदि ये उपलब्ध न हो तो कंबल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। पाठ करने के दौरान स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। नीले या काले रंग के वस्त्र न पहनें। पाठ करने के दौरान जम्हाई लेना या आलस करने का निषेध है। ऐसा करने से दोष लगता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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