मल्टीमीडिया डेस्क। सूर्य आराधना को समर्पित यह त्यौहार भक्तिभाव, स्वच्छता और शुद्धता के साथ मनाया जाता है। इस व्रत का पालन महिला और पुरुष दोनों ही करते हैं। प्रकृति से जुड़े इस पर्व में सूर्य और नदी या सरोवर के तट का बहुत महत्व है।

छठ व्रत की पूजा विधि

चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस पर्व की शुरूआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाए खाए के साथ होती है। इस दिन व्रती आत्म शुद्धि के लिए केवल शुद्ध आहार ग्रहण करते हैं। नहाए खाए के दूसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना रखा जाता है, जिसमें शरीर का शुद्धिकरण करके पूजन के बाद शाम के समय गुड़ की खीर और पुरियां बनाकर छठी माता को भोग लगाया जाता है। गुड़ की इस खीर को सबसे पहले प्रसाद के रूप में व्रत करने वालों को खिलाया जाता है। उसके बाद ब्राम्हणों और परिवार के लोगो में वितरित किया जाता है।

कार्तिक शुक्ल छठ के दिन घरों में सूर्यदेव को चढ़ाने के लिए कई तरह के पकवान बनाये जाते है और सूर्यास्त होने के साथ ही सारे पकवानों को बड़े-बड़े बांस के डालों में भरकर नजदीक की नदी या सरोवर के घाट पर ले जाया जाता है। नदी के तट पर ईख का घर बनाकर दीप जलाया जाता है। व्रत करने वाले सभी स्त्री और पुरूष नदी या सरोवर के जल में स्नान कर पकवान और पूजा सामग्री से भरे डालों को हाथ में उठाकर छठी माता और भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं। सूर्यास्त के पश्चात व्रति अपने-अपने घरों को लौट जाते हैं और सूर्य देवता के लिए रात्रि जागरण करते हैं। रातभर छठ के गीत गाए जाते हैं।

कार्तिक शुक्ल सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले ब्रम्ह मुहूर्त में सभी व्रती एक डाले में मिष्ठान्न, नारियल और फल रखकर नदी के तट पर सारे व्रती जमा होते हैं। सप्तमी की सुबह व्रती उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देते हैं। अर्ध्य देने के बाद छठ व्रत की कथा का वाचन किया जाता है और प्रसाद का वितरण होता है। व्रती प्रसाद को ग्रहण कर व्रत का पारण करते हैं।

छठ अनुष्ठान विधि

छठ के दिन व्रती को सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। व्रती को अपने घर के पास एक झील, तालाब या नदी में स्नान करना चाहिए। स्नान से निवृत्त होकर सूर्योदय के सामने खड़े होकर सूर्य देवता को नमन कर विधिवत पूजन करना चाहिए। शुद्ध घी का दीपक जलाकर सूर्यदेव को धुप और फूल अर्पण करें। छठ पूजा में सात प्रकार के फूल, चावल, चंदन, तिल आदि से युक्त जल सूर्य को अर्पण करें। इसके बाद ओम घृणिं सूर्याय नमः, ओम घृणिं सूर्य: आदित्य:, ओम ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा, या फिर ओम सूर्याय नमः का 108 बार जप करें। अब सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन, कपड़े, अनाज आदि का दान करें।

Posted By: Yogendra Sharma

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