मल्टीमीडिया डेस्क। कलयुग में हनुमानजी को जागृत और साक्षात देव माना गया है। मान्यता है कि हनुमानजी चिरंजीवी हैं अर्थात उनको अमरत्व का वरदान प्राप्त है।

अश्वत्थामा बलिव्रयासयो हनूमांश्च विभीषण:।

कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥

सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।

जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।

इन आठ लोगों अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय ऋषि का स्मरण सुबह-सुबह करने से सारी बीमारियां समाप्त होती हैं और मनुष्य 100 वर्ष की आयु को प्राप्त करता है।

सीता ने हनुमान को लंका की अशोक वाटिका में राम का संदेश सुनने के बाद आशीर्वाद दिया था कि वे अजर-अमर रहेंगे। अजर-अमर का अर्थ है कि जिनको ना कभी मृत्यु का वरण करना होगा और ना ही कभी ये वृद्धावस्था को प्राप्त होंगे। इस कारण भगवान हनुमान को हमेशा शक्ति का स्रोत माना गया है क्योंकि वे चीरयुवा हैं।

वैसे तो हनुमानजी को सभी मनोकामनों की पूर्ती करने वाला देव माना जाता है। उनकी आराधना करना हमेशा शुभ फलदायी रहता है, लेकिन नवरात्रि के अवसर पर की गई साधना विशेष फलदायी होती है। हनुमानजी की उपासना से दुख,क्लेश, रोग और संकटों का नाश होता है और सुख-समृद्धि का वरदान प्राप्त होता हैं। शास्त्रों में कई तरह से हनुमानजी की पूजा-आराधना का विधान है, लेकिन नवरात्रि के पावन अवसर पर एक दिन के इस सहज, सरल उपाय से साधक अपनी कैसी भी मुश्किल हो उससे छुटकारा प्राप्त कर धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकता है।

हनुमान चालीसा के 108 पाठ करें

नवरात्रि में मंगलवार या शनिवार के दिन इस आराधना को करना विशेष फलदायी होता है। सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर हनुमानजी के मंदिर जाएं। हनुमानजी को लाल गुड़हल या गुलाब के फूलों की माला समर्पित करें। सिंदूर चढ़ाएं, गुड़-चना या चिरोंजी या बूंदी के लड्डूओं का भोग लगाएं. साथ में लाल फल और श्रीफल समर्पित करें। तिल्ली या सरसों के तेल का दीपक जलाएं और धूपबत्ती प्रज्वलित करें। इसके बाद हनुमनजी के सामने कुश या ऊन का लाल आसन बिछाकर बैठें और 108 बार लगातार हनुमान चालीसा का पाठ करें।

इस आराधना में यह कोशिश करें की 108 पाठ एक बैठक में हो जाएं। कोशिश करें की उठने की जरूरत न रहे।

इसके साथ ही नवरात्रि में सात्विक भोजन और ब्रहमचर्य का पालन करें। नवरात्रि के पावनपर्व पर एक दिन के लिए सच्चे मन से की गई इस विशेष आराधना से हनुमानजी अपने भक्त की सभी मनेकामनाओं को पूरा करते हैं।

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