Dev Uthani Ekadashi 2020: देवउठनी एकादशी पर बुधवार को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल की एकादशी से भगवान विष्णु चिर निद्रा में चले जाते हैं और फिर चार महीनों तक वो विश्राम करते हैं। इसके बाद आज के दिन भगवान विष्णु निद्रा से उठते हैं। इसलिए उनकी पूजा की जाती है। भगवान के उठने के साथ ही शुभ कार्यों का आरंभ हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। भगवान विष्णु की पूजा में मंत्रों का विशेष महत्व है। यहां पढ़िए भगवान विष्णु के 10 आसान मंत्र

1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

2. श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

3. ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

4. ॐ हूं विष्णवे नम:

5. ॐ विष्णवे नम:

6. ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।

7. ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।

ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।

8. दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।

धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।

9. ॐ अं वासुदेवाय नम:

ॐ आं संकर्षणाय नम:

ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:

ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:

ॐ नारायणाय नम:

10. ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।

आज के दिन होता है तुसली विवाह, जानिए क्यों

धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की एकादशी देवउठनी एकादशी कहलाती है। क्योंकि इस दिन देव गहरी निद्रा से सोकर उठते हैं और इसी के साथ शुरू हो जाते हैं शादी-विवाह जैसे मंगल कार्य। देवउठनी एकादशी के अगले ही दिन द्वादशी को तुलसी व भगवान शालिग्राम का विवाह भी कराया जाता है। इस विवाह के बाद ही हिंदू धर्म को मानने वाले विवाह संबंधी शुभ कार्य कर सकते हैं। भगवान विष्णु ही शालिग्राम रूप में होते है और तुलसी व भगवान नारायण का विवाह कराया जाता है।

Posted By: Arvind Dubey

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