मल्टीमीडिया डेस्क। दिपावली के पर्व का प्रारंभ धनतेरस से होता है। इस दिन हर शख्स बाजार से अपनी सामर्थ्य केे अनुसीर खरीदारी करता है। बाजारों में इन दिनों काफी रौनक रहती है। इस दिन शास्त्रों के अनुसार शुभ धातुओं की खरीदारी करने से घर-परिवार में बरकत आती है और मानव जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। धनतेरस के अवसर पर धन की देवी महालक्ष्मी, धन के देव कुबेर और आरोग्य के देवता धन्वंतरी की पूजा का खास विधान है। मान्यता है कि धनतेरस के अवसर पर देवी लक्ष्मी, कुबेर देव और देवता धन्वंतरी की पूजा से सुख,समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन विभिन्न शुभ मुहूर्तों में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है।

धनतेरस की कथा

शास्त्रोक्त मान्यता है कि एक समय भगवान विष्णु पृथ्वीलोक पर भ्रमण के लिए आ रहे थे उस समय देवी लक्ष्मी ने भी उनसे साथ चलने की बात कही।तब विष्णु जी ने कहा कि यदि मैं जो बात कहूं तुम अगर वैसा ही मानो तो फिर मेरे साथ चल सकती हो। तब माता लक्ष्मी ने विष्णुजी बात मान ली और पृथ्वीलोक पर भ्रमण के लिए आ गईं। भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी से कहा कि मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं मेरे वापस आने तक तुम यहीं ठहरना।

लक्ष्मीजी ने मना करने के बावजूद उनके पीछे गई। उन्होंने विष्णुजी के पीछे जाते हुए एक खेत से सरसों के फूल तोड़कर श्रंगार किया और गन्ने तोड़कर उसका रस पीया। जब विष्णुजी को इस बात का पता चला तो उन्होंने किसान के खेत में चोरी करने के आरोप में लक्ष्मीजी को 12 साल तक किसान की सेवा करने का श्राप दे दिया। लक्ष्मीजी किसान के घर रहने लगी।

एक दिन उन्होंने किसान से उनके द्वारा बनाई गई लक्ष्मी प्रतिमा की पूजा करने को कहा और बताया कि इससे तुम काफी समृद्ध हो जाओगे। किसान ने ऐसा ही किया और वह खुशहाल हो गया। 12 साल बाद श्राप से मुक्त लक्ष्मीजी को लेने जब भगवान विष्णु आए तो किसान ने मना कर दिया। तब लक्ष्मीजी ने कहा कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को तुम विधि-विधान से मेरी पूजा करो और एक कलश में सिक्के भरकर रखना उसमें मैं तुम्हारे यहां हमेशा निवास करूंगी। इस तरह से धनतेरस का पर्व मनाने की शुरुआत हुई।

इन शुभ मुहूर्त में करें धनतेरस की पूजा

तिथि - 25 अक्टूबर 2019, शुक्रवार

पूजन मुर्हूत - शाम 7 बजकर 8 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट तक

प्रदोष काल - 5 शाम बजकर 38 मिनट से 8 बजकर13 मिनट तक

वृषभ काल -शाम 6 बजकर 50 मिनट से 8 बजकर 45 मिनट तक

त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ - 25 अक्टूबर 2019 को 19 बजकर 8 मिनट से

त्रयोदशी तिथि समाप्त - 26 अक्टूबर 2019 को दोपहर 3 बजकर 46 मिनट तक

धनतेरस पूजाविधि

धनतेरस की पूजा में मिट्टी का हाथी और भगवान धन्वन्तरि का चित्र स्थापित करें। चांदी या तांबे से बनी हुई आचमनी से जल का आचमन करें। भगवान गजानन का ध्यान और पूजन करें। हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर भगवान धन्वन्तरि का ध्यान करें।

देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान

दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः

पायोधि मंथन विधौ प्रकटौ भवधो

धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः

ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः

ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि

हाथ में लिए फूल को जमानपर छोड दें और जल का आचमन करें।

3 बार जल का छिड़काव करें और यह मंत्र बोलें

पाद्यं अर्घ्यं आचमनीयं समर्पयामि।

भगवान धन्वंतरि के चित्र का इस मंत्र को बोलते हुए शुद्ध जल से स्नान कराएं।

मंत्र : ॐ धनवन्तरयै नमः

मंत्र :स्नानार्थे जलं समर्पयामि

भगवान धन्वंतरि का पंचामृत स्नान कराएं

मंत्र : ॐ धनवन्तरायै नमः

मंत्र : पंचामृत स्नानार्थे पंचामृत समर्पयामि ||

भगवान धन्वंतरि का जल से स्नान कराएं।

मंत्र : पंचामृत स्नानान्ते शुद्धोधक स्नानं समर्पयामि ||

भगवान धन्वंतरि को इत्र समर्पित करें।

मंत्र : सुवासितं इत्रं समर्पयामि

भगवान धन्वंतरि को वस्त्र या मौली अर्पित करें

मंत्र : वस्त्रं समर्पयामि

भगवान धन्वंतरि को रोली या लाल चंदन से तिलक करें।

गन्धं समर्पयामि (इत्र चढ़ाएं)

अक्षतान् समर्पयामि (चावल चढ़ाएं)

पुष्पं समर्पयामि (फूल स चढ़ाएं)

धूपम आघ्रापयामि (अगरबत्ती जलाएं)

दीपकं दर्शयामि ( जलते दीपक की पूजा करें फिर उसी से आरती करें)

नैवेद्यं निवेद्यामि (प्रसाद समर्पित करें, प्रसाद के आसपास पानी घुमाएं)

आचमनीयं जलं समर्पयामि (अपने आसन के आसपास पानी छोड़ दें)

ऋतुफलं समर्पयामि (फल समर्पित करें, फल के चारों तरफ पानी घुमाएं)

ताम्बूलं समर्पयामि (पान समर्पित करें)

दक्षिणा समर्पयामि (चांदी-सोने के सिक्के हो तो उन्हें अर्पित करें या फिर घर में रखें रुपए-पैसे समर्पित करें।

कर्पूर नीराजनं दर्शयामि ( कर्पूर जलाकर आरती करें)

अब भगवान धन्वंतरि जी से यह प्रार्थना करें : हे धन्वंतरि देव समस्त जगत को निरोग कर मानव समाज को दीर्घायु प्रदान करें। हमें सपरिवार आरोग्य का वरदान प्रदान करें।

धन तेरस की शाम को प्रदोषकाल में अपने घर के मुख्य दरवाजे पर अन्न की ढेरी लगाकर दोनों तरफ दीपक प्रज्वलित करें और यमराजजी का ध्यान करते हुए यह मंत्र बोलें।

मंत्र : मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह |

त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यजः प्रीयता मिति ||

कुबेर का ध्यान करें

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधि पतये धनधान्य समृद्धि में देहि दापय दापय स्वाहा।।

पूजा के आखिरी में मां लक्ष्मी, कुबेर, गणेश, मिट्टी के हाथी और धन्वंतरि जी सभी का एक साथ पूजन करें और आरती करें।

धनतेरस पर करें यह काम

धनतेरस के दिन नई झाडू और सूपड़े को खरीदने का विधान है। इस दिन मंदिर, नदी के घाट, कुओं, जलाशयों और बगीचों में दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। तांबे, पीतल, चांदी के गहने या बर्तनों की खरीदारी करना चाहिए। कुबेर का पूजन करना चाहिए। संध्याकाल में तेरह दीपक जलाकर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए। यम के लिए एक दीप जलाएं। मुख्य द्वार को स्वच्छ और शुद्ध कर इसके दोनों और दीपक जलाएं।

धनतेरस पर न करें यह काम

घर के पुराने बेकार और खराब सामान को बाहर निकाल दें। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मुख्य द्वार के आसपास गंदगी न करें। सिर्फ कुबेर की पूजा न करें उनके साथ लक्ष्मी और धन्वंतरी की पूजा करें। कांच के सामान की खरीदारी न करें। दिन में शयन करने से बचें। गृहकलह न करें और किसी को भी इस दिन उधार धन ना दें।

धनतेरस पर राशिनुसार करें इन वस्तुओं की खरीदारी

मेष - कपड़े, सोना, चांदी

वृषभ - कम्प्यूटर,कांसा, पीतल, हीरा

मिथुन - रत्न, भूमि, मकान

कर्क - शकर, सफेद वस्त्र, वाहन

सिंह - सोना, इलेक्ट्रॉनिक सामान

कन्या - फर्नीचर, हरा वस्त्र, पन्ना, सोना

तुला -हीरे के गहने, परफ्यूम, कॉस्मेटिक

वृश्चिक - लाल वस्त्र, जमीन, मकान

धनु - धातु से बनी चीजें, भूमि, मकान

मकर - सोने से निर्मित चीजें

कुंभ - स्टेशनरी का सामान, वाहन

मीन - चांदी, रत्न, पुखराज, सोना

धनतेरस पर राशिनुसार इन वस्तुओं को न खरीदें

मेष - लोहे से बनी वस्तुएं

वृषभ - तेल, लकड़ी का सामान, चमड़े से बनी वस्तुएं

मिथुन - लकड़ी का सामान, एल्युमिनियम

कर्क - काली वस्तुएं

सिंह - लोहे से बना सामान

कन्या - सफेद रंग के कपड़े

तुला - वाहन, लोहे से बनी वस्तुएं

वृश्चिक - काले रंग के कपड़े

धनु - फर्नीचर, सौंदर्य सामग्री

मकर - पीले वस्त्र, पीले रंग के मिष्टान्न

कुंभ - लोहे से बनी वस्तुएं

मीन - एल्युमिनियम से बना सामान

Posted By: Yogendra Sharma