मंदसौर। Dhanteras 2019 धनतेरस पर धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के जनक भगवान 'धन्वंतरि' की भी विशेष आराधना की जाएगी। शहर से सटे खिलचीपुरा में स्थित 1200 वर्ष पुराने धौलागढ़ महादेव मंदिर (Dholagarh Mahadev Temple) में सातवीं शताब्दी की भगवान कुबेर की प्राचीन मूर्ति स्थापित है। बताया जाता है कि श्री केदारनाथ के बाद मंदसौर में धौलागढ़ महादेव मंदिर में ही शिव पंचायत में भगवान कुबेर विराजित हैं। इस मंदिर में धनतेरस के दिन विशेष पूजा की जाती है। इस बार भी मंदिर में धनतेरस पर 25 अक्टूबर को दिनभर अनुष्ठान होंगे। भारतीय ज्योतिष परिषद अध्यक्ष पं. शिवप्रकाश जोशी के अनुसार गांधीसागर अभयारण्य क्षेत्र में स्थित तक्षकेश्वर महादेव मंदिर (ताखाजी) में भगवान धन्वंतरी की मूर्ति है।

यह भारत भर में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर की ख्याती क्षेत्र के लोगों में बहुत ज्यादा है। यहां आस-पास के शहरों और गांवों से लोग दर्शन को पहुंचते हैं। विशेष रूप से धनतेरस और दीपावली पर्व के दौरान यहां भक्त कुबेर देवता और भगवान धन्वंतरी के दर्शन करने पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि मंदिर में दर्शन करने से उन्हें कभी पैसों की समस्या नहीं होती।

भगवान कुबेरदेव मंदिर पर महाआरती

भानपुरा का प्राचीन धनपति कुबेरदेव मंदिर भी भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां धनतेरस के महाआरती होती है। इसके बाद प्रसाद में पंचमेवे का वितरण किया जाता है। इस मंदिर में भी लोग दूर-दूर से दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। ऐसा माना जाता है कि मंदिर में दर्शन करने से कुबेर देवता उनकी धन संबंधी समस्या दूर करते हैं।

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