मल्टीमीडिया डेस्क। धन की प्राप्ति के लिए मानव अनेक उपाय करता है। इसमें पूजा-पाठ से लेकर दान-पूण्य और हवन तक का आयोजन किया जाता है। वर्ष में कुछ विशेष अवसर ऐसे होते हैं जब माता महालक्ष्मी की कृपा भक्तों को सहज-सरल तरीके से प्राप्त हो जाती है। इनमें सबसे प्रमुख पर्व दिपावली का होता है। इस दिन कुछ खास यंत्रों को लक्ष्मी पूजा में रखकर उनकी पूजा करने और उसके बाद सालभर यंत्रों की आराधना से धन-धान्य की प्राप्ति होती है।

महालक्ष्मी यंत्र

देवी महालक्ष्मी को धन की माना जाता है। भगवान विष्णु की अर्द्धांगिनी देवी लक्ष्मी की आराधना से धन-धान्य और सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है। श्री महालक्ष्मी यंत्र की अधिष्ठात्री देवी कमला को माना जाता है। यानी इस यंत्र की उपासना करते समय सफेद हाथियों के द्वारा स्वर्ण कलश से स्नान करती हुई कमलासन पर बैठी महालक्ष्मी का ध्यान करना चाहिये। शास्त्रों के अनुसार इस यंत्र के रोजाना दर्शन और पूजन से अपार धन की प्राप्ति होती है।

इस यंत्र की पूजा पौराणिक काल से हो रही है। इस यंत्र की आकृति में बिन्दु, षटकोण, वृत, अष्टदल और भूपुर का समावेश किया जाता है। श्री महालक्ष्मी यंत्र की सभी आकृतियां शास्त्रोक्त और देवी देवताओं की प्रतीक होती हैं। इस यंत्र को सिद्ध या अभिमंत्रित करने के लिए लक्ष्मी मंत्र को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। महालक्ष्मी मंत्र जप के लिए कमलगट्टे की माला का प्रयोग सर्वोत्तम माना गया है।

श्री कुबेर यंत्र

इस तरह कुबेर यंत्र को भी धन देने वाला माना जाता है। श्रीयंत्र के साथ कुबेर यंत्र की स्थापना से विपुल धन की प्राप्ति होती है। कुबेर यंत्र के देवता कुबेर देव है।

इस यंत्र की आराधना से यक्षराज कुबेर प्रसन्न होकर विपुल सम्पत्ति प्रदान करते हैं और साथ ही उसकी रक्षा भी करते हैं। यह यंत्र सोने-चांदी से बनाना शुभ और फलदायी होता है, जहां लक्ष्मी प्राप्ति की दूसरी सभी साधनाएं विफल हो जाती हैं,वहां इस यंत्र की उपासना से जल्दी लाभ होता है।

कुबेर यंत्र का निर्माण विजयादशमी, धनतेरस, दीपावली तथा रविपुष्य नक्षत्र और गुरुवार या रविवार को किया जाता है। कुबेर यंत्र की स्थापना तिजोरियों और धन रखने की अलमारियों में की जाती है। कुबेर धन के देवता है और देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं। पृथ्वीलोक की समस्त धन संपदा के भी एकमात्र वही स्वामी हैं। कुबेर महादेव के परमप्रिय सेवक हैं।

Posted By: Yogendra Sharma