ग्वालियर नईदुनिया प्रतिनिधि। धनतेरस से पांच दिवसीय दीपोत्सव दीपावली का शुभारंभ हो जाता है। इस बार धनतेरस शुक्र प्रदोष और ब्रह्मयोग में मनाई जाएगी। धनतेरस के दिन बाजारों में ग्राहकों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिलती है। साथ ही सोना, चांदी, जेवरात, जमीन जायदाद सहित गाड़ियों की खरीदारी भी सबसे अधिक इसी दिन होती है।

इस बार शुक्रवार को प्रदोषकाल में त्रयोदशी होने से मंगलकारी शुक्र प्रदोष व ब्रह्मयोग का संयोग बनेगा, जो खरीदारी को शुभ फल प्रदान करेगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि एवं लक्ष्मी व कुबेर पूजन के साथ अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए दीपदान किया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित गौरव उपाध्याय के अनुसार कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी की शुरुआत 25 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 8 मिनट से होगी, जो अगले दिन शनिवार को दोपहर 3.46 बजे तक रहेगी। प्रदोषकाल में त्रयोदशी तिथि होने से इस दिन धनतेरस मनाना श्रेष्ठ रहेगा।

धनतेरस पर सुबह 9 बजकर 51 मिनट से ब्रह्मयोग लगेगा। धनतेरस पर शाम को लक्ष्मी और कुबेर का पूजन किया जाता है। इसके अलावा अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए यम दीपदान भी होता है। इस दिन की गई खरीदी व प्रदोषकाल में की गई खरीदी को अतिशुभ माना गया है। इस दिन चांदी, पीतल के बर्तन, चांदी के सिक्के, गणेश व लक्ष्मी की प्रतिमाएं खरीदी जाती हैं।

खरीदी को माना गया शुभ, प्रकट हुए थे भगवान धन्वंतरि

ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन धन्वंतरि जयंती मनाई जाती है। आयुर्वेद के विद्वान इस दिन धन्वंतरि की प्रतिमा स्थापित कर पूजन करते हैं। इस दिन चांदी के बर्तन की खरीदी को अति शुभ माना जाता है। शाम को घर के मुख्य द्वार पर अन्न रखकर चार बत्ती का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए।

पूजन व दीपदान के मुहूर्त

- चर : शाम 5 बजकर 2 मिनट से 6 बजकर 32 मिनट तक

- लाभः रात 9 बजकर 32 मिनट से 11 बजकर 2 मिनट तक।

- प्रदोषकालः शाम 5 बजकर 39 से रात 8 बजकर 14 मिनट तक।

Posted By: Nai Dunia News Network