Diwali 2020: दिगंबर जैन समाज 14 नहीं बल्कि 15 नवंबर को दीपावली मनाएगा। इस अवसर पर भगवान महावीर को निर्वाण लाडू चढाए जाएंगे। मंदिर में अष्ट द्रव्यों से पूजन के साथ निर्वाण कांड का पाठ होगा और मोक्षकल्याणक अर्घ्य को अर्पण करने के साथ ही निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। भगवान महावीर के जीवन चरित्र पर संतों के प्रवचन होंगे। दर्शन-पूजन के लिए समाजजनों की कतार जिनालयों में लगेगी। सभी आयोजन कोरोना के प्रोटोकाल का पालन करते हुए किए जाएंगे। दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष भरत मोदी ने बताया कि दिगंबर जैन समाज दीपावली पर भगवान महावीर को निर्वाण लाडू अर्पित करता है। पिछले दिन दिन होने वाले पूजन पर असमंजस की स्थिति थी जिसे संतों के मार्गदर्शन में सुलझा लिया गया था। इस संबंध में मुनि सुधा सागर महाराज ने शंका समाधान किया है।

उनका कहना है कि 15 नवम्बर को सुबह भगवान महावीर स्वामी जी का मोक्ष कल्याणक पर्व मनाया जाना चाहिए क्योंकि 14 नवम्बर को दोपहर में 2 बजकर 17 मिनट के बाद अमावस्या लगेगी जो की 15 नवम्बर को सुबह 10 बजकर 36 मिनिट तक रहेगी। जैन धर्म के अनुसार भगवान महावीर का मोक्ष अमावस्या के अंतिम पहर के समय हुआ था। इसके चलते 14 को मोक्ष कल्याणक नहीं मनाया जाए। 15 नवंबर कार्तिक सुदी अमावस्या को सुबह मोक्ष कल्याणक मनाना उचित है। इस अवसर पर मंदिर में निर्वाण लाडू चढ़ाए । इसके बाद फिर शाम को गोतम गणधर की केवलज्ञान महापूजन करे।

अमावस्या के अंतिम पहर में मिला मोक्ष

महामंत्री संजय पाटोदी ने बताया कि जैन धर्म के अनुसार महावीर स्वामी को मोक्ष कार्तिक कृष्णा अमावस्या के अंत मे सुबह के समय हुआ था और उस दिन सभी जैन धर्मावलंबी आदि महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक को निर्वाण लाडू चढ़ाते हैं। तीर्थंकर पदवी से विभूषित महावीर स्वामी मोक्ष गमन कर गए इसीलिए दिन भर अपने घर में घी के दीपक जलाते हैं क्योंकि घी के दीपक घर में मांगलिक माने जाते हैं। इससे दीपक जलाने से भगवान को केवल ज्ञान रूपी ज्योति प्राप्त हुई ऐसे ही हमको भी केवल ज्ञान व मोक्ष रूपी ज्योति प्रकट हो।जब महावीर भगवान को पावापुरी से मोक्ष हुआ और गौतम गणधर को शाम को गोधूलि बेला के समय बिहार मे नवादा से केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था। गोतम गणधर के केवल ज्ञान प्राप्ति के पश्चात पूजा का महत्व रहता है। पूजा में गौतम गणधर की पुजा,देव शास्त्र गुरु का अर्घ, 64 रिद्धि-सिद्धि मंत्रों के अर्घ आदि दे देना चाहिए।

Posted By: Arvind Dubey

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