Diwali 2021 Special: राजस्थान के बीकानेर में हर साल दिवाली पर उर्दू में लिखी रामायण का वाचन होता है। यह रामायण वर्ष 1935 में लखनऊ के मौलवी बादशाह हुसैन राणा लखनवी ने बीकानेर में लिखी थी। उस जमाने में इसे गोल्ड मेडल से नवाजा गया था। आज भी इसे उर्दू में छंद में लिखी सबसे अच्छी रामायण मानी जाता है। खास बात है कि यह सिर्फ नौ पृृष्ठों की है। इसमें छह-छह पंक्तियों के 27 छंदों में पूरी रामायण समा गई है।

सबसे अच्छी रामायण का गोल्ड मेडल मिला था

हर साल पर्यटन लेखक संघ और महफिल-ए-अदब संस्था उर्दू रामायण का वाचन करवाता है। संस्था से जुड़े असद अली असद बताते हैं कि 1935-36 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने एक स्पर्धा हुई थी। कहा गया था कि अपनी मातृृभाषा में कविता की शक्ल में रामायण लिखें। मौलवी राणा यूं तो लखनऊ के थे, लेकिन उस समय बीकानेर रियासत में महाराजा गंगा सिंह के यहां उर्दू-फारसी के फरमान अनुवाद किया करते थे।

मौलवी राणा के मित्र ने उन्हें स्पर्धा के बारे में बताया। चूंकि मौलवी साहब ने रामायण नहीं पढ़ी थी। इसलिए उन्होंने एक कश्मीरी पंडित से रोज रामायण का पाठ सुना और इसे उर्दू में लिखते चले गए। इस तरह यह रामायण तैयार हुई। इसे बनारस भेजा गया और इसे सबसे अच्छी रामायण मानते हुए गोल्ड मेडल से नवाजा गया।

आधा घंटे में रामायण पढ़ना चाहें तो स्वागत है

पर्यटन लेखक संघ के सचिव डॉ. जिया उल हसन कादरी बताते हैं उस जमाने में महाराजा गंगा सिंह ने इसे आठवीं के कोर्स में शामिल किया था। बाद में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने भी इसे कोर्स में रखा। हालांकि अब नहीं है।

मूल उर्दू रामायण तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन मौलवी राणा पर किसी ने किताब लिखी है और उसमें रामायण को छापा गया है। इसी से हम हर साल दिवाली पर इसका वाचन करते हैं। कोई यदि सिर्फ आधा घंटे में रामायण पढ़ना चाहता है तो इसे पढ़ सकता है।

Posted By: Arvind Dubey