Ekadashi fast in Bhadrapada Month। सावन का पवित्र माह खत्म हो चुका है और भादो मास आज से शुरू हो चुका है। भादो मास का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है और इस माह में भी कई महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं, लेकिन भादो मास में आने वाले एकादशी व्रत का महत्व बहुत ज्यादा होता है। हर माह में दो बार एकादशी व्रत होते हैं। एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा एक कृष्ण पक्ष में। हिंदू पंचांग के मुताबिक पूरे साल में कुल 24 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बहुत प्रिय होती है। इसलिए इस दिन पूरे विधि विधान के साथ एकादशी व्रत करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। यहां जानें भाद्रपद मास में एकादशी व्रत की तारीख, पूजा- विधि और पूजन सामग्री की लिस्ट -

भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष एकादशी

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। अजा एकादशी 13 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी।

भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष एकादशी

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी के नाम से जानी जाती है और पद्मा एकादशी 6 सितंबर, मंगलवार को है।

एकादशी व्रत पूजा- विधि

इन दोनों की ही एकादशी व्रत को पूरे विधान से करना चाहिए, जिससे भगवान विष्णु प्रसन्न होती है। यदि आप भी ये दोनों एकादशी व्रत करना चाहते हैं तो सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और उसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करने के बाद गंगा जल से अभिषेक करने के बाद तुलसी दल अर्पित करें। एकादशी व्रत के दिन ज्यादा तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। संभव हो को उपवास भी कर सकते हैं। विधि विधान से पूजा करने से बाद भगवान विष्णु जी की आरती करना चाहिए।

पूजा में सात्विक चीजों का लगाएं भोग

भगवान विष्णु को पूजा के दौरान सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। धार्मिक मान्यता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं। इस बात का भी ध्यान रखें कि भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करें।

एकादशी व्रत के लिए पूजन सामग्री

श्री विष्णु जी का चित्र अथवा मूर्ति, पुष्प, नारियल, सुपारी, फल, लौंग, धूप, दीप, घी, पंचामृत, अक्षत, तुलसी दल, चंदन, मिष्ठान

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'

Posted By: Sandeep Chourey

  • Font Size
  • Close