Ganesh Chaturthi 2021: गणेश चतुर्थी का पर्व देश में बहुत ही उत्साह और हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। खासकर महाराष्ट्र में इस त्योहार की धूम देखते ही बनती है, लेकिन कोरोना महामारी के कारण पिछले साल इस पर्व की रौनक फीकी रही थी और इस साल भी कोरोना की तीसरी लहर के खतरे के चलते कई तरह की पाबंदियों के साथ यह त्योहार मनाया जाएगा। इस दौरान पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है क्योंकि हमारी लापरवाही के चलते ही लगातार ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है।

परंपरा के अनुसार हिंदू धर्म में पृक्रति की भी पूजा की जाती है और हम ऐसी चीजों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, जो आसानी से हमारे आस-पास मिलती हैं और वहीं सपृमाप्त भी हो जाती हैं, लेकिन समय बदलने के साथ हमारी आदतें बदली हैं और इनमें से कुछ आदतें पर्यावरण के लिए नुकसानदेह भी हैं। हमें इन आदतों को त्यागकर पुरानी आदतें अपनाने की जरूरत है। इसी वजह से यहां हम इको-फेंडली गणेश चतुर्थी मनाने के तरीके बता रहे हैं।

1. मिट्टी के गणपति ही घर लाएं

पारंपरिक मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं 100 प्रतिशत बायोडिग्रेडेबल हैं और विसर्जन के बाद पानी में घुल जाती हैं। वहीं प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां पानी में नहीं घुलती और नदियों को खराब करती हैं। इससे पानी में रहने वाले जीवों को भी नुकसान होता है।

2. छोटी गणेश मूर्ति ही खरीदें

यह त्योहार भक्तों में बहुत उत्साह लाता है और उनमें से कई भव्य या कम से कम मध्यम आकार की मूर्तियों स्थापित करने की इच्छा रखते हैं। बड़ी मूर्तियां महंगी होने के साथ ही प्रदूषण ज्यादा फैलाती हैं और पानी में घुलने में ज्यादा समय लेती हैं, इसलिए छोटी मूर्ति ही घर लाएं।

3. पेड़ गणेश की मूर्तियों का चुनाव करें

पेड़ गणेश की मूर्तियों की अवधारणा कुछ साल पहले मुंबई के कारीगर दत्ताद्री कोथुर द्वारा शुरू की गई थी, लेकिन अब यह एक प्रसिद्ध अवधारणा है। ये मूर्तियां प्राकृतिक रंगों, उर्वरकों, लाल मिट्टी से बनी हैं और इनके भीतर एक बीज है, जो एक पौधे के रूप में विकसित होता है। इसलिए मूर्ति को विसर्जित करने के बजाय, इसे एक बर्तन में रखा जा सकता है और हर दिन पानी पिलाया जा सकता है।

4. अपनी खुद की गणेश मूर्ति बनाएं

आप कागज, कार्बनिक पेंट, कार्बनिक गोंद और मिट्टी से गणेश की मूर्ति खुद बना सकते हैं। एक आसान तरीका यह है कि मिट्टी, जैविक गोंद और कागज के टुकड़ों का उपयोग करके आटा बनाया जाए और फिर इसे एक मूर्ति में ढाला जाए, जिसे बाद में जैविक पेंट से रंगा जा सके। मूर्ति बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली सभी चार सामग्री पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं और इसलिए, मूर्ति को आसानी से पानी में विसर्जित किया जा सकता है।

5. चॉकलेट के गणेश जी भी हैं इको फ्रेंडली

चॉकलेट के गणेश जी की अवधारणा भी नई है। आप मिट्टी या सोने-चांदी के गणेश की बजाय चॉकलेट के गणेश की स्थापना कर सकते हैं। चॉकलेट के गणेश को पानी की बजाय दूध से भरे बड़े बर्तन में विसर्जित किया जाता है और इस दूध को प्रसाद के रूप में सभी भक्तों को पिलाया जाता है। यह तरीका इको-फ्रेंडली होने के साथ ही हेल्दी भी है।

Posted By: Arvind Dubey