मल्टीमीडिया डेस्क। गणपति गजानन को रिद्धि- सिद्धि के दाता और बुद्धि का प्रदाता माना जाता है। प्रथम पूजनीय गणेश की गणेशोत्सव के पहले यानी गणेश चतुर्थी के दिन स्थापना की जाती है। दस दिनों तक गणेशोत्सव भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है और इसके बाद अनन्त चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा की धूमधाम से विदाई की जाती है। इस दिन स्थापित प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।

विसर्जन की मान्यता

शास्त्रों के अनुसार श्री वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से लेकर अनन्त चतुर्दशी तक गणेशजी को लगातार 10 दिन तक सुनाई थी जिसे श्री गणेश जी ने महाकाव्य का रूप दिया था। 10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो देखा कि 10 दिन की कड़ी मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत अधिक हो गया है। तुरंत वेद व्यास जी ने गणेश जी को नजदीक के कुंड में ले जाकर ठंडा किया था। इसलिए गणेश चतुर्थी को गणेशजी की स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतलता प्रदान करते हुए विसर्जित किया जाता है।


शास्त्रोक्त मान्यता यह भी है कि देवी-देवताओं की मूर्तियों को जल में विसर्जित करने से उनका देवतुल्य अंश मूर्ति से निकलकर अपने स्वलोक पहुंच जाता है यानी परम ब्रह्म में लीन हो जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि मूर्ति के समान जीवन भी मिट्टी से बना है और वह आखिरी में प्रतिमा की तरह मिट्टी में मिल जाता है। यानी प्रकृति से जो चीज आती है वह अंत में प्रकृति को समर्पित कर दी जाती है। इसिलिए गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

गणेश विसर्जन की पूजा

अनन्त चतुर्दशी को पहले गणेशजी की शास्त्रोक्त पूजा करे। देव प्रतिमा पर फूल अर्पित करें। ऋतुफल, मोदक, लड्डू, पंचामृत और इसके साथ पान का पत्ता, सुपारी और लौंग चढ़ाएं। गणेशजी की आरती करें। एक पाट लेकर उसके ऊपर गंगाजल या शुद्ध जल को छिड़कें। उसके ऊपर स्वास्तिक बनाएं। अब उसके ऊपर अखंड चावल रखकर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं।

पाट के चारों कोनों पर एक एक सुपारी रख दें और खूबसूरत सुगंधित फूलों की पंखुड़ियां बिछा दें। इस पाट पर अब गणपति बप्पा को विराजमान करें। पाट पर विराजमान गणेशजी को नदी, सरोवर या समुद्र के किनारे लेकर जाएं। इस दौरान मंगलगीत, बाजे, और ढोल के साथ बप्पा का विसर्जन जुलूस निकाला जाता है। अब गणेशजी की प्रतिमा को जल में विसर्जित करते हुए उनसे अगले साल फिर से आने की प्रार्थना करें। स्थापना के दिनों में हुई गलती के लिए क्षमायाचना करें।

इस बात का ख्याल रखें

इस दौरान काले कपड़े ना पहने। मांस-मदिरा का सेवन ना करें। सात्विकता का पालन करें। किसी को अपशब्द कहने से बचे। इस दौरान गणपति के शास्त्रोक्त मंत्रों का जप करते रहे। मध्याह्न के पहले गणेश विसर्जन की कोशिश करें। विसर्जन घर में भी कर सकते हैं। रिद्धि-सिद्धि एवं शुभ-लाभ घर में ही रहने दें। गणेशजी के पीठ में दरिद्रता का वास होता है इसलिए उनकी पीठ के दर्शन न करें।

अनन्त चतुर्दशी के मुहूर्त

इस साल अनन्त चतुर्दशी 12 सितंबर सुबह 5:06 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7:35 तक है। इस दिन शुभ मुहूर्त हैं- सुबह 6:01 से 07:32 तक, सुबह 10:34 से 3:07 तक, शाम 4:38 से 9:07 बजे तक, फिर रात 12:05 से तड़के 1:34 तक है।