Geeta Jayanti 2019: कुरुवंश की जब बात होती है तो षडयंत्र, राजपाठ के द्वंद, पारिवारिक विवाद और युद्ध की विभीषिका आंखों के सामने आती है, लेकिन कुरुवंश में जन्म लेने वाले कोई भी स्त्री - पुरूष साधारण मानव नहीं थे। इनमें ज्यादातर देवताओं के अंश थे। ये सभी धरती पर कुछ विशेष प्रयोजन के लिए आए थे और कार्यसिद्ध होने के पश्चात वे अपने लोक में प्रस्थान कर गए। पांचों पांडवों में देवअंश विद्यमान था इसलिए वो धर्म के मार्ग पर चलकर पापकर्म का सदैव विरोध करते रहे। सभी पाण्डवों ने पृथ्वी पर देवत्व का अंश लेकर अवतरण किया था। इसलिए पांचों पांडवों के कर्मों में सदगुणों का समावेश था।

ज्येष्ठ पांडुपुत्र धर्मराज युधिष्ठिर धरती पर धर्म के अंशावतार थे, इसलिए धरती पर धर्मध्वजा के ध्वजवाहक वह थे और जीवन के अंतिम समय तक वह उस पर डटे रहे। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने बुजुर्गों को दिए गए वचनों का ताउम्र पालन किया। विपत्तियों में तपकर वह सोना बने और घर, परिवार और समाज के नियमों से ऊपर उठकर उन्होंने धर्म की रक्षा की ।

अर्जुन थे इन्द्र के अंशावतार

भीमसेन वायु के अंशावतार थे और उनके बलशाली और शक्तिशाली होने से उनके चर्चे ब्रह्मांण्ड के कोने-कोने मे विद्यमान थे। अर्जुन स्वर्गाधिपति महाराजाधिराज इन्द्र के अंशावतार के रूप में धरती पर अवतरित हुए थे। इस कारण अर्जुन इन्द्र के प्रिय थे और उनकी खास कृपादृष्टी अर्जुन पर बनी हुई थी। नकुल और सहदेव आश्विनीकुमारों के अंशावतार थे।

इसी प्रकार अर्जुन पुत्र वीर अभिमन्यु चंद्रमा के अंश रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। अभिमन्यू के धरती पर आने की कथा भी काफी रोचक है। चंद्रमा ने पहले तो अभिमन्यु को धरती पर भेजने से स्पष्ट मना कर दिया था और कहा था कि मैं अपने प्रिय पुत्र को धरती पर भेजने का में बिल्कुल इच्छुक नहीं हूं, परन्तु इस कार्य से पीछे हटना किसी भी हालत में ठीक नहीं है इसलिए वह मानव रूप में धरती पर जाएगा तो सही, लेकिन धरती पर बहुत ज्यादा दिनों तक रहेगा नहीं।

अभिमन्यु था चंद्रमा का पुत्र

उस समय चंद्रमा ने भविष्यवाणी की थी कि इंद्र के अंशावतार नरावतार अर्जुन होंगे, जो नारायण के अवतार श्रीकृष्ण से मित्रता करेगें और मेरा यह पुत्र अर्जुन का ही पुत्र होगा। नर और नारायण दोनों के युद्धभूमि में न रहने पर मेरा पुत्र युद्ध में चक्रव्यूह का भेदन करेगा और बड़े-बड़े महारथियों को युद्ध में टक्कर देकर सायंकाल को आकर मुझसे मिलेगा। मेरे पुत्र की पत्नी से जो पुत्र होगा वही कुरुकुल का वंश आगे बढ़ाएगा। सभी देवताओं ने चंद्रमा के वचनों पर सहमति प्रदान की।

रुकमणी थी देवी लक्ष्मी की अवतार

धृष्टद्युम्न अग्नि के अंश के रूप में अवतरित हुए थे वहीं शिखण्डी एक राक्षस के अंशावतार बनकर धरती पर अवतरित हुए थे। विश्वदेवगण का अवतरण द्रौपदी के पांचो पुत्र प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ति, शतानिक और श्रुतसेन के रूप में धरती पर हुआ था। भगवान श्रीहरी नारायण के अंश से श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ था। इंद्र की आज्ञा से अप्सराओं के अंश के रूप में सोलह हजार स्त्रियों का जन्म हुआ था।

देवी लक्ष्मी ने राजा भीष्मक की पुत्री रुकमणी के रूप में और इन्द्राणी ने द्रुपद के यहां यज्ञकुण्ड से द्रौपदी के रूप में जन्म लिया था। सिद्धी और धृतिका का कुन्ती और माद्री के रूप में धरती पर अवतरण हुआ था। मतिका का अवतरण राजा सुबल की पुत्री गांधारी के रूप में हुआ था।

Posted By: Yogendra Sharma

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