Hanuman Jayanti 2020: महाबली हनुमान की स्तुति में कई रचनाएं की गई है। इन सभी रचनाओं में उनका भावभीना गुणगान किया गया है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अनन्य भक्त गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान का गुणगान करते हुए कुछ स्तुतियों को रचा है। इनमें से हनुमान चालीसा प्रमुख है। अवधि भाषा में लिखी गई इस काव्यात्मक रचना में 40 छंद हैं। इसलिए इसको चालीसा और हनुमानजी के गुणगान के कारण इसको हनुमान चालीसा कहते हैं। कहा यह भी जाता है कि तुलसीदासजी ने बचपन में हनुमानजी से साक्षात बात की थी। उसी बातचीत का उन्होंने हनुमान चालीसा में समावेश किया है।

हनुमानजी की शक्तियों का समावेश है हनुमान चालीसा में

यह भी मान्यता है कि हनुमानजी को एक बार बचपन में जब भूख लगी तो वह सूर्य को फल समझकर निगल गए थे। बजरंगबली के पास अपार शक्तियां था इसका उपयोग कर जब वह सूर्य को निगलने के लिए आगे बढ़े तो देवराज इन्द्र ने अपने व्रज से प्रहार कर उनको मूर्छित कर दिया। हनुमानजी के मूर्छित होने की बात जब पवनदेव को पता चली तो वह काफी नाराज हुए।

ऐसे में देवताओं को हनुमानजी के रुद्र अवतार होने का पता चला तो सभी ने उनको कई शक्तियां प्रदान की। मान्यता है कि देवताओं ने जिन मंत्रों और हनुमानजी की विशेषताओं को बताते हुए उन्हें शक्तियां प्रदान की थी, उन्हीं मंत्रों के सार को गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में समाहित किया है। दरअसल हनुमान चालीसा में मंत्र न होकर हनुमानजी के पराक्रम की विशेषताएं बतलाई गईं हैं।

हनुमान चालीसा से होता है कई कष्टों का उपाय

हनुमान चालीसा एक बेहद सहज और सरल बजरंगबली की आराधना में की गई एक काव्यात्मक 40 छंदों वाली रचना है। तुलसीदासजी बाल्यावस्था से ही श्रीराम और हनुमान के भक्त थे, इसलिए उनकी कृपा से उन्होंने महाकाव्यों की रचना की है। मान्यता है कि हनुमान चालीसा के पाठ से कई तरह की तकलिफों का नाश हो जाता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि के साथ आरोग्य का वास होता है। यदि किसी कारण मन अशांत है तो हनुमान चालीसा के पाठ से मन को शांति मिलती है। हर तरह के भय का नाश भी इसके पाठ से होता है।

सनातन संस्कृति में हनुमान चालीसा के पाठ का विशेष महत्व बतलाया गया है। इसको श्रद्धापूर्वक, एकाग्रचित्त होकर पढ़ने से कई व्याधियों से छुटकारा मिल जाता है। हनुमान चालीसा के पाठ से शनि संबंधी कष्टों का नाश होता है। शनि की साढ़ेसाती, ढैया, पनौती, शनि का नीच का या कुंडली में अशुभ फल देने पर हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी होता है। इसके पाठ से बुरी शक्तियों का नाश होता है और हनुमान भक्त के पास वो फटकती भी नहीं है। किसी अपराध के हो जाने पर हनुमान चालीसा का पाठ कर क्षमायाचना करने से उस अपराध से मुक्ति मिल जाती है।

हनुमान चालीसा के पाठ से मिलती है बल और बुद्धि

जीवन में किसी बात को लेकर हो रहे तनाव की दशा में हनुमान चालीसा के पाठ से मन को काफी शांति का अहसास होता है। किसी यात्रा के लिए प्रस्थान करने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ पढ़कर यात्रा करने से उसके सफल होने के योग बढ़ जाते हैं। महाबली हनुमान बल और बुद्धि के देवता है, इसलिए इसका पाठ करने से इन दोनों की प्राप्ति होती है। हनुमान चालीसा दैवीय गुणों से ओतप्रोत है इसलिए इसका पाठ संयम रखकर, नियमों के साथ श्रद्धापूर्वक करने से अलौकिक शक्ति का अहसास होता है।

इसके पाठ से तन-मन की शुद्धि होती है और मानव हर तरह से निर्मल हो जाता है। हनुमान चालीसा के पाठ से शरीर, मन और घर-परिवार की नकारात्मकता दूर होकर सकारात्मकता का प्रवाह होता है। रात्रि के समय हनुमान चालीसा का पाठ 8 बार पढ़ने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि जो मानव रात के समय हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं उनकी रक्षा स्वयं महाबली हनुमान करते हैां।

हनुमान चालीसा

॥दोहा॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

॥चौपाई॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

राम दूत अतुलित बल धामा । अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥

महाबीर बिक्रम बजरङ्गी । कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥

कञ्चन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै ॥

सङ्कर सुवन केसरीनन्दन । तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥

॥प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥

लाय सञ्जीवन लखन जियाये । श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥

रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥

सहस बदन तुह्मारो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना । राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥

तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना । लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥

जुग सहस्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥

दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥

राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥

सब सुख लहै तुह्मारी सरना । तुम रच्छक काहू को डर ना ॥

आपन तेज सह्मारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥

नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥

सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥

सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥

और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ॥

चारों जुग परताप तुह्मारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥

साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ॥

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥

राम रसायन तुह्मरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥

तुह्मरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

अन्त काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥

और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥

सङ्कट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥

जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥

।।दोहा॥

पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

Posted By: Yogendra Sharma

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