Hanuman Jayanti 2020: बजरंबली की आराधना उनके भक्त अनेकों तरीके से करते हैं। हनुमानजी को लाल फूल चढ़ाते हैं। उनको नारियल, बूंदी के लड्डू, गुड़-चना आदि का भोग लगाते हैं। हनुमानजी की प्रतिमा पर चमेली के सुगंधित तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चड़ाकर उसके ऊपर सोने-चांदी का वर्क लगाते हैं। उनको रत्नजड़ित आभूषणों से सजाते हैं और विभिन्न स्तुतियों से उनका गुणगान करते हैं। हनुमानजी को प्रिय और संकटों का नाश करने वाली एक ऐसी ही हनुमान स्तुति है बजरंगबाण।

गोस्वामी तुलसीदासजी ने की थी बजरंगबाण की रचना

श्रीराम भक्त गोस्वामी तुलसीदासजी से बजरंगबाण की रचना की थी। मान्यता है कि एक बार काशी में तुलसीदासजी पर किसी तांत्रिक ने मारण मंत्र का प्रयोग किया। इससे तुलसीदासजी के शरीर पर फोड़े हो गए। तुलसीदासजी ने जब बजरंगबाण की रचना कर इसका पाठ किया तो उनकी बीमारी ठीक हो गई। तभी से कष्टों के निवारण के लिए इसको उत्तम स्तुति माना जाता है। बजरंग बाण का पाठ करने के लिए पहले संकल्प लें। अपने कार्य की सिद्धि के लिए मंगलवार या शनिवार का दिन चुन लें।

हनुमानजी की मूर्ति या चित्र को अपने सामने रखे। बैठने के लिए लाल रंग के ऊन का आसन प्रयोग करें। कार्य सिद्धि के लिए स्थान की शुद्धता और शांत वातावरण भी जरूरी है। हनुमानजी के मंदिर में किया गया बजरंग बाण का पाठ ज्यादा फलदायी होता है। पाठ को प्रारंभ करने से पहले अपने गुरु और श्रीगणेश का ध्यान करें। हनुमानजी से अपने कष्ट या मनोकामना कहें और पाठ का प्रारंभ करें।

बजरंग बाण का पाठ करने के लाभ

यदि आप शत्रुओं और विरोधियों से बहुत ज्यादा परेशान है तो हर मंगलवार को 11 बार बजरंग बाण का पाठ करें, सभी तरह की शत्रुबाधा का नाश होगा। बजरंग बाण का रोजाना पाठ करने से आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है और व्यक्ति निर्भीक बनता है। जो बच्चे निडर नहीं होते हैं और छोटी-छोटी बातों से डर जाते हैं उनको बजरंग बाण का पाठ करवाना चाहिए।

कार्यों में आ रही अड़चन को दूर करने के लिए शनिवार के दिन 21 बार बजरंग बाण का पाठ करने से बाधाओं का निवारण हो जाता है। किसी साक्षात्कार में सफलता प्राप्त करने के लिए पांच बार बजरंग बाण का पाठ कर इंटरव्यू के लिए जाने पर सफलता मिलती है। कारोबार में हो रहे नुकसान को थामने के लिए कारोबार वाली जगह पर आठ मंगलवार तक लगातार बजरंग बाण का पाठ करने से लाभ होगा।

विवाह की बाधा का होता है निवारण

विवाह में यदि कोई बाधा आ रही है या दांपत्य जीवन में कोई तनाव है तो केले के पेड़ के नीचे बजरंग बाण का पाठ करें। विवाह की बाधाओं का नाश होता है। ग्रहदोष की पीड़ा में भी बजरंग बाण का पाठ बेहद फलदायी है। सुबह के समय आटे के दीपक में लाल बत्ती जलाकर बजरंग बाण का पाठ करने से सभी तरह के ग्रहदोष का नाश हो जाता है। घर में यदि किसी तरह का कोई वास्तुदोष है तो उसके निवारण के लिए तीन बार बजरंगबाण का पाठ करना चाहिए।

घर की दक्षिण दिशा में हनुमानजी का लाल झंडा लगाना चाहिए। वास्तुदोष से मुक्ति मिलेगी। नौकरी संबंधी कोई दिक्कत हो तो रात्रि के समय नक्षत्र दर्शन करने के बाद बजरंगबाण का पाठ करें। इसके साथ ही मंगलवार का व्रत भी रखें। गंभीर बीमारी होने की दशा में रोजाना दो बार बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही संजीवनी पर्वत की रंगोली बनाकर उस पर तुलसी के 11 दल चढ़ाने से सेहत में सुधार होने लगता है।

चमत्कारी श्री बजरंग बाण

बजरंग बाण ध्यान

अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।

दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।।

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।

रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

दोहा

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।

चौपाई

जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।

जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।

आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।

बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।

अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।

लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।।

अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।।

जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।

ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।।

गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।।

सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।।

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।।

सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।।

जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।

वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।

पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।।

जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।।

बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।।

भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।।

इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।।

जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।।

जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।।

उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पांय परौं कर जोरि मनाई।।

ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।

ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।।

अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।।

ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।।

ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।।

हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।।

हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।।

जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।।

जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।।

जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।।

जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।।

जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।।

ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।।

राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।।

विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भांति।।

तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।।

यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।।

सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।।

एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।।

याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।।

मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।।

पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।

डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।।

भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।।

प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।।

आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छांह काल नहिं चापै।।

दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।।

यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।।

शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर कांपै।।

तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।।

दोहा

प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।

तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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