Happy Mesha Sankranti 2020: सूर्य को जीवन का दाता और प्रकृति का पालक-पोषक माना जाता है। सूर्य कि किरणों से धरती पर जीवन है और पेड़-पौधों से लेकर इंसान तक की जीवन की दिनचर्या चलती है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का विशेष महत्व है और इसको नवग्रह में राजा का दर्जा प्राप्त है। सूर्य हर एक महीने में राशि परिवर्तन करता है और इस तरह से एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करता है। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को संक्राति कहा जाता है। इस बार सूर्य 14 अप्रैल को मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करेगा। इसलिये इसको मेष संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का मेष राशि में भ्रमण शुभ फलदायी होता है। इस दिन दान, पुण्य, तर्पण आदि का बड़ा महत्व होता है।

मेष संक्राति को होता है सौर मास का प्रारंभ

इस दिन सौर वर्ष का प्रारंभ भी सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से माना जाता है। मान्यता है कि मेष संक्रांति को सूर्य की उत्तरायण की आधी यात्रा पूर्ण होती हैं | भारत के अलग-अलग राज्यों में Mesh Sankranti को अलग-अलग नामों से जाना जाता है | पंजाब में वैशाख, केरल में विशु, पश्चिम बंगाल में पोइला बैसाख, ओडिशा में पना संक्रांति या महा विषुव संक्रांति , तमिलनाडु में पुथांदु, बिहार में सतुआनी और उत्तराखंड में इसको बिखोती के नाम से जाना जाता है। इस दिन दान-धर्म के साथ भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा का विधान है।

मान्यता है कि मेष संक्रांति के दिन संक्रांति से चार घंटे पहले और चार घंटे बाद तक पुण्यकाल रहता है। इसलिए इस दिन स्नान-दान और पितरों का तर्पण श्रेष्ठ फलदायी होता है। इस दिन सूर्य उपासना के साथ गुड़ और सत्तू का सेवन किया जाता है।

सूर्य पूजा का है विशेष महत्व

इस दिन सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देने से भगवान सूर्यनारायण की कृपा प्राप्त होती है। मेष संक्रांति के दिन सूर्योदय के पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाए। लाल वस्त्र धारण कर एक तांबे के लोटे में जल भर लें। जल में रक्त चंदन, लाल फूल और कुमकुम डालें। अब सूर्योदय की दिशा में मुंह करके जल से भरे लोटे को सर से ऊपर उठाकर जल की पतली धार बनाकर सूर्य को अर्घ्य दें। जल को किसी बर्तन में एकत्रित कर लें बाद में इसको किसी पेड़ या पौधे में डाल दें। सूर्य को जल देते समय गायत्री मंत्र का या सूर्यदेव के मंत्रों का जाप करते रहें।

सूर्य आराधना से सूर्य ग्रह से संबंधी दोषों का निवारण होता है और उनकी कृपा प्राप्त होती है। सूर्य आराधना से यश, कीर्ति और वैभव की प्राप्ति होती है।

Posted By: Yogendra Sharma

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