Happy Pongal 2020: पोंगल पर्व दक्षिण भारत की संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है। यह त्यौहार दक्षिण भारत विशेष कर तमिलनाडु का एक प्राचीन त्यौहार है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह पर्व 200 से 300 ईस्वी पूर्व का है। पोंगल को भी नई फसल के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। पोंगल पर्व का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। पौराणिक कथाएं भी पोंगल पर्व के साथ जुड़ी हुई है। पोंगल से संबंधित दो कथाओं का शास्त्रों में वर्णन मिलता है, जो महादेव, इंद्र और श्रीकृष्ण से जुड़ी हुई है।

शिव से संबंधित कथा

महादेव से संबंधित एक पौराणिक कथा के अनुसार, भोलेनाथ ने अपने बैल बसव को स्वर्ग से पृथ्वी में जाकर मनुष्यों को एक सन्देश देने को कहा था। भगवान शिव ने यह संदेश धरती के मानव के हित को ध्यान में रखकर दिया था। किंतु बसव ने पृथ्वीलोक पर पहुंचकर पृथ्वीवासियों को इसकी उलटी सलाह दी और उसने भगवान शिव के आदेश के विपरीत काम किया। भगवान शिव को बसव का व्यवहार अच्छा नहीं लगा और उन्होंने अपने बैल बसव को श्राप दे दिया और कहा कि वह हमेशा के लिए पृथ्वी पर रहने के लिए स्वर्ग से निकाल दिये गये हैं और दंड स्वरूप उनको ज्यादा अन्न उपजाने के लिए मनुष्यों की मदद के लिए हल जोतना होगा. इस तरह यह पर्व जानवरों के साथ सम्बन्ध रखता है ।

भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित कथा

पोंगल से जुड़ी एक अन्य कथा भगवान् श्रीकृष्ण और स्वर्गाधिपति इंद्र से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण जब अपनी बाल्यावस्था में थे तो उन्होंने इंद्र को सबक सिखाने का निर्णय लिया। इंद्र को देवताओं के राजा होने के कारण अभिमान हो गया था। श्रीकृष्ण ने अपने ग्रामवासियों को इंद्र की पूजा करने से रोकने के लिए कहा। जब इंद्र को इसका पता चला तो वो बहुत नाराज हुए और उन्होंने दंड देने के लिए तूफानी बारिश का सहारा लिया। उस वक्त श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी सी उगली में उठा लिया था। जब इंद्र को अपनी गलती की अहसास हुआ तो उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से माफी मांगी और इसके साथ ही इंद्र का घमंड भी चूर हो गया।

Posted By: Yogendra Sharma

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