Haridwar Kumbh 2021 । आस्था के सबसे बड़े उत्सव कुंभ मेले की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, श्रद्धालुओं ने इसके प्रति उत्साह बढ़ते जा रहा है। इस बार आस्था का सैलाब हरिद्वार में 27 फरवरी से उमड़ना शुरू हो जाएगा। आखिर आपने कभी सोचा है कि कुंभ मेला 27 फरवरी को ही क्यों शुरू रहा है। आखिर हर बार कुंभ मेले की तारीख किस तरह से तय की जाती है। आइये आज इसी के बारे में जानते हैं -

- इस बार कुंभ मेला माघ पूर्णिमा से शुरू होगा, जो हरिद्वार में आयोजित होने वाला है। कोरोना महामारी के कारण यह मेला ज्यादा लंबी अवधि के कारण नहीं चलेगा, सिर्फ एक माह में ही इस बार कुंभ मेला खत्म हो जाएगा। वैसे कुंभ मेला 48 दिनों तक चलने की परंपरा है।

- कुंभ मेले के आयोजन के बारे में तिथियों का निर्धारण राशियों के आधार पर होता है। कुंभ मेले की तिथि और स्थान को तय करने में बृहस्पति और सूर्य ग्रह की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये दोनों ग्रहों की स्थितियां ही निर्धारित करती है कि देश में कहां कुंभ मेला लगना है और किस दिन इसकी शुरुआत होगी। बृहस्पति और सूर्य के राशियों में प्रवेश करने से ही मेले का स्थान और तिथि निर्धारित होता है।

- जिस वर्ष में बृहस्पति कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब उस वर्ष कुंभ मेला देव नगरी हरिद्वार में आयोजित होता है। यह हिन्दी कैलेंडर के माघ मास में पड़ता है।

- इसके अलावा हिंदू पंचाग के अनुसार जिस वर्ष सूर्य देव मकर राशि में और बृहस्पति देव मेष या वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं, उस साल कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित होता है। सनातन कैलेंडर के प्रथम मास चैत्र में लगता है।

- सूर्य देव और बृहस्पति एक ही राशि सिंह में प्रवेश करते हैं, उस वर्ष कुंभ मेला नासिक में आयोजित किया जाता है। नासिक कुंभ भाद्रपद मास में आयोजित होता है।

- उज्जैन में लगने वाले कुंभ मेले की बात करें तो यह तब आयोजित होता है, जब बृहस्पति देव सिंह राशि में और सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं। यही कारण है कि इसे सिंहस्थ कुंभ भी कहा जाता है क्योंकि इसका संबंध सिंह राशि से होता है। सिंहस्थ कुंभ वैशाख मास में लगता है।

- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सागर मंथन के समय प्राप्त हुए अमृत कलश को सुरक्षित करने में सूर्य, बृहस्पति, शनि और चंद्र ग्रहों का महत्वपूर्ण योगदान था। इस वजह से कुंभ की तिथि निर्धारण में इस सभी ग्रहों की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है।

Posted By: Sandeep Chourey

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