महाशिवरात्रि के बाद फागुन का महीना लग जाता है और हर तरफ होली की तैयारियां दिखने लगती हैं। बाजार में रंगों और पिचकारियों का बिकना शुरू हो जाता है। मगर, इससे पहले होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और होलाष्टक लगता है, जिन आठ दिनों में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। उज्जैन की ज्योतिषविद रश्मि शर्मा ने बताया कि इस बार होलाष्टक 03 मार्च फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि और मंगलवार के दिन से शुरू होकर नौ मार्च को होलिका दहन तक रहेगा। नौ मार्च को सूर्यास्त के बाद गोधूलि वेला से लेकर रात 11:55 बजे तक होलिका दहन का मुहूर्त रहेगा।

इसके बाद 10 मार्च को होली खेली जाएगी। ज्योतिषविद रश्मि शर्मा ने बताया कि होलाष्टक के (प्रथम दिन) फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप में रहता है।

इसीलिए इन आठों दिन में लोग मानसिक अशांति, शंकाओं और विकारों से घिरे रहते हैं। ऐसे में शुरू किए गए कार्य के बनने के बजाय बिगड़ने की आशंका ज्यादा रहती है। इसीलिए इन दिनों में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। होलिका दहन वाली रात को आध्यात्मिक दृष्टि से भी खास माना जाता है। मान्यता है कि होलिका दहन की रात जप, ध्यान और साधना के लिए अत्यंत शुभ है। इसके अगले दिन रंगों से एक दूसरे को रंगकर लोग खुशी मनाते हैं।

पौराणिक आधार पर यह है मान्यता

वहीं, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एस्ट्रोलॉजर्स सोसाइटी (AIFAS) के कानपुर चैप्टर के चेयरमैन पंडित शरद त्रिपाठी ने बताते हैं कि पौराणिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक काल के दौरान ही हिरण्यकश्यप के आदेश पर उसके बेटे भक्त प्रहलाद को घोर यातनाएं दी गई थीं। भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद हर यातना को हंसते हुए पार कर गया था।

होलिका दहन की पवित्र अग्नि जलाकर उसमें सभी तरह की बुराई, अहंकार और नकारात्मकता को जलाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का दिन भी है। इसलिए होलाष्टक के दिनों में कोई शुभकार्य नहीं करने का चलन है।

पंडित शरद त्रिपाठी ने बताया कि ऐसी भी मान्यता यह भी है कि होलाष्टक की शुरुआत वाले दिन यानी फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को ही शिव जी ने कामदेव को भस्म कर दिया था। इसलिए भी होलाष्टक में कोई शुभकार्य नहीं किए जाते हैं। नौंवे दिन यानी होलिका दहन के अगले दिन लोग रंग खेलकर अपने मन को प्रसन्न करते हैं और शुभ कार्यों का समय शुरू हो जाता है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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