Holi 2020: होली का पर्व देश के ज्यादातर हिस्सों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। रंगों की छटा से माहौल सराबोर रहता है और हर कोई इसकी मस्ती में मस्त रहता है। होली के त्यौहार का पौराणिक महत्व है और सनातन संस्कृति के धर्म शास्त्रों में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। देवी-देवताओं की कथाएं होली के त्यौहार से जुड़ी हुई है और रंगों के इस त्यौहार का रंग स्वर्ग से लेकर पृथ्वीलोक तक बिखरा होता है।

हर देवता का है एक प्रिय रंग

धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका का दहन होली के दिन किया जाता है और दूसरे दिन धुलेंडी पर रंग खेला जाता है। धुलेंडी पर रंग खेलने की शुरूआत देवी-देवताओं को रंग लगाकर की जाती है। इसके लिए सभी देवी-देवताओं का एक प्रिय रंग होता है और उस रंग की वस्तुएं उनको समर्पित करने से शुभता मिलती है, उनकी कृपा प्राप्त होती है, जीवन में समृद्धि मिलती है , खुशहाली आती है और धन-धान्य से घर भरे हुए होते हैं।

श्रीकृष्ण को पीला तो महालक्ष्मी को लाल रंग है अतिप्रिय

सभी देवताओं के अपने प्रिय रंग होते हैं इसलिए होली के दिन उनके प्रिय रंगों से उनसे होली खेलकर होली के पर्व का प्रारंभ करना चाहिए। श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है। इसलिए श्रीकृष्ण को पीतांबर कहा जाता है और पीले फूल, पीले वस्त्र से वह सजे हुए रहते हैं। होली के दिन भगवान श्रीकृष्ण को पीला रंग समर्पित करना चाहिए। देवी लक्ष्मी, हनुमानजी और भेरू महाराज को लाल रंग अति प्रिय है। इसलिए इन तीनों देवी-देवताओं को होली के अवसर पर लाल रंग लगाना चाहिए।

मां बगुलामुखी को पीला रंग पसंद है इसलिए उनको होली के अवसर पर पीला रंग समर्पित करना चाहिए। सूर्यनारायण को लाल रंग पसंद है इसलिए उनको लाला गुलाल समर्पित करना चाहिए। भगवान शनिदेव को काला रंग पसंद है इसलिए उनको काला रंग समर्पित करना चाहिए।

Posted By: Yogendra Sharma

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
जीतेगा भारत हारेगा कोरोना