भुवनेश्वर : सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मिलने के बाद श्रीक्षेत्र धाम पुरी में मंगलवार को महाप्रभु श्रीजगन्नाथजी की भक्त विहीन घोष यात्रा का आयोजन किया गया। हर साल जहां महाप्रभु की इस यात्रा को देखने के लिए लाखों की संख्या में भक्त इकट्ठा होते थे, इस बार कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से आम लोगों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पुरी शहर पूरी तरह से बंद रह। रथयात्रा में सिर्फ श्रीमंदिर के सेवक ही रथ के पास दिखाई दिए। उन्होंने ही भगवान के रथ को खींचकर गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाया। इधर, बाउरी बंधु दास महापात्र नाम का सेवायत मौसीबाड़ी के सामने रथ से उतरने के दौरान गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया।

भगवान जगन्नाथ के भक्तों ने टीवी पर रथयात्रा के दर्शन किया। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी टीवी पर ही रथयात्रा के सीधे प्रसारण को देखा। बाहर से किसी वाहन या व्यक्ति को श्रीक्षेत्र धाम में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। बड़दांड यानी श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक जाने के रास्ते को भी पुलिस छावनी में तब्दील कर सील कर दिया गया था।

पूर्व निर्धारित रीति के अनुसार, सुबह तीनों रथों की पूजा-अर्चना की गई। श्रीजगन्नाथजी के रथ पर विराजमान होने से पहले सुबह बजकर45 मिनट पर श्रीमंदिर के पुरोहित ने रथ पूजा कार्यक्रम को संपन्न किया। फिर तीनों रथों पर देवी-देवताओं को विराजमान किया गया। इसके बाद रथों पर कलश की स्थापना की गई। फिर पहंडी बिजे संस्कार यानी श्री विग्रहों - श्रीजगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भाई बलभद्र को रथ तक लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले प्रभु सुदर्शन (सुदर्शन चक्र), फिर देवी सुभद्रा को दर्पदलन रथ पर पहंडी बिजे में विराजमान किया गया। इसके बाद प्रभु बलभद्र पहंडी में लाकर तालध्वज रथ पर विराजित किया गया। आखिर में महाप्रभु श्रीजगन्नाथ पहंडी बिजे में लाए गए और नंदीघोष रथ पर विराजित किए गए।

इसके बाद उत्साह और उमंग के साथ श्रीमंदिर के सेवक अनुशासित तरीके से श्री विग्रहों को पहंडी बिजे के पश्चात रथों को खींचकर गुंडिचा मंदिर तक ले गए। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 11 बजे से 12 बजकर 15 मिनट के बीच गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव ने रथ के ऊपर छेरा पहरा अर्थात रजत झाड़ू लगाया। प्रभु बलभद्र जी का रथ दोपहर 3 बजकर 50 मिनट तक श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने पहुंचा। देवी सुभद्रा का रथ शाम 4 बजकर12 मिनट पर श्रीगुंडिचा मंदिर पहुंचा। आखिर में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ बड़दांड पर जैसे ही चलना प्रारंभ हुआ, घंटा ध्वनि के साथ "जय जगन्नाथ नयन पथ गामी भव तुमे" उद्घोष से पूरा श्रीक्षेत्र धाम गूंज उठा। महाप्रभु श्रीजगन्नाथजी का नंदी घोष रथ दोपहर 5 बजकर10 निनट पर श्री गुंडिचा मंदिर के सामने पहुंचा।

इस बार महाप्रभु के रथों पर सेवायतों की पहले जैसी भीड़ नहीं थी, क्योंकि सेवायत स्वयं नीचे उतरकर रथों को खींचने के काम में लगे हुए थे। हर साल रथयात्रा में भक्तों के द्वारा रथों को खींचा जाता हैं और सेवायत रथों पर सवार रहते हैं। इधर, गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव ने भक्तों को घरों पर रहकर टीवी के जरिए रथयात्रा देखने का अनुरोध किया था।

इधर, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रथयात्रा पर पाबंदी लगाने की मांग करने वाले ओडिशा विकास परिषद के अध्यक्ष सुशांत पाढी के घर पर लोगों ने पथराव किया। यह घटना भुवनेश्वर लक्ष्मीसागर केनाल रोड स्थित उनके आवास पर हुई। गुस्साए लोगों ने उनके घर पर अंडे और पत्थर भी फेंके। इसके बाद उनके घर पर पुलिस की तैनाती कर दी गई है।

मथुरा में आश्रम परिसर में निकाली रथ यात्रा

श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में भगवान जगन्नाथ की परंपरागत रथयात्रा विधि-विधान के साथ आश्रम परिसर में निकाली गई। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से इस वर्ष नगर भ्रमण का कार्यक्रम नहीं हो सका। भगवान श्रीजगन्नाथ, बलराम, सुभद्रा, श्रीचक्र के विग्रह को संकीर्तन के मध्य फूलो से सुसज्जित दिव्य काष्ठ रथ में विराजमान करवाया गया। श्रीजगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा के अनुसार श्रंगार और आरती श्रीविग्रह को समर्पित की गई। रथ खींचने का अवसर पाने वाले अपने को धन्य समझ रहे थे।

Posted By: Yogendra Sharma

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