मल्टीमीडिया डेस्क। चतुर्थी तिथि को चांद के दर्शन और उसको अर्घ्य देकर आराधना करने का विशेष महत्व है। वैसे तो हर चतुर्थी तिथि को चांद का महिलाएं बड़ी बेसब्री से इंतजार करती है, लेकिन करवा चौथ के अवसर पर चांद के दीदार की बेसब्री कुछ ज्यादा ही बड़ जाती है। महिलाएं करवा चौथ की पूजा के बाद चंद्रोदय की राह देखती रहती है। देश के विभिन्न हिस्सों में चांद के उदय का अलग-अलग समय होता है और उस समय के अनुसार महिलाएं पूरी तैयारी कर आसमान को निहारती रहती है। चांद इस सितारों भरी रात में पहले अपनी चांदनी को बिखेरता है उसके बाद बादलों की ओट से निकलकर उदय होता है।

इंदौर में 8:24 पर होगा चंद्रोदय

इस साल करवा चौथ 17 अक्टूबर गुरुवार के दिन है। इस दिन मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में चांद के उदय होने का समय रात में 8 बजकर 24 मिनट है और यह धरती से 8 बजकर 41 मिनट पर दिखाई देगा। इसके साथ ही धार, रतलाम, मंदसौर, देवास, उज्जैन जैसे नजदीक के शहरों में चंद्रोदय के समय में 2 से 3 मिनट का अतंर रहेगा। इसलिए इंदौर के आसपास के शहरों, कस्बों और गांवों में 8 बजकर 26 मिनट के आसपास चंद्रोदय होगा और इसके दर्शन 8 बजकर 44 मिनट के लगभग होंगे। इसके आसपास का समय संपूर्ण मध्य प्रदेश में चंद्रोदय का रहेगा। इस तरह मध्य प्रदेश के सभी शहरों, कस्बों और गांवों में चंद्र दर्शन 9 बजे के पहले हो जाएगा। रायपुर में करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 11 मिनट रहेगा।

श्रीगणेश का सिर है चांद पर

पौराणिक आख्यानों में चतुर्थी तिथि की रात को चंद्र देवता को अर्घ्य देने और पूजा का विधान बताया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार जब पिता महादेव ने श्रीगणेश का सिर धड़ से अलग किया था तब उनका कटा हुआ सिर सीधे चंद्रलोक चला गया था। मान्यता है कि आज भी श्रीगणेश का कटा हुआ सिर चंद्रलोक में है। इसलिए श्रीगणेश और शिव-पार्वती के साथ चतुर्थी तिथि को चंद्रमा की भी पूजा की जाती है। यह भी मान्यता है कि चंद्रमा को लंबी आयु का वरदान मिला हुआ है। इसलिए महिलाएं चांद की पूजा कर अपने पति के लिए लंबी उम्र का वरदान मांगती है। चंद्रमा शिवजटा में विराजमान है और जटा में विराजित चंद्र दीर्घायु होने का प्रतीक है। चंद्र शीतलता और प्यार प्रदान करता है। इसलिए महिलाएं चांद से अपने पति के लिए लंबी आयु के साथ, शीतलता और प्रेम मांगती है।

Posted By: Yogendra Sharma