मल्टीमीडिया डेस्क। रिद्धि-सिद्धि के दाता और बुद्धि का प्रदाता गजानन का अपने घर में 10 दिनों तक सत्‍कार, सेवा और पूजा के बाद गणेश विसर्जन की परंपरा है। प्रथम पूजनीय गणेश की गणेशोत्सव के पहले यानी गणेश चतुर्थी के दिन स्थापना की जाती है। दस दिनों तक गणेशोत्सव भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है और इसके बाद अनन्त चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा की धूमधाम से विदाई की जाती है। इस दिन स्थापित प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।

अनन्त चतुर्दशी के मुहूर्त

इस साल अनन्त चतुर्दशी 12 सितंबर सुबह 5:06 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7:35 तक है। इस दिन शुभ मुहूर्त हैं- सुबह 6:01 से 07:32 तक, सुबह 10:34 से 3:07 तक, शाम 4:38 से 9:07 बजे तक, फिर रात 12:05 से तड़के 1:34 तक है।

गणेश विसर्जन के लिए चौघड़‍िया मुहूर्त

सुबह का मुहूर्त (शुभ) : 12 सितंबर 2019 को सुबह 06 बजकर 08 मिनट से सुबह 07 बजकर 40 मिनट तक।

सुबह का मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) : सुबह 10 बजकर 45 मिनट से दोपहर 03 बजकर 22 मिनट तक।

दोपहर का मुहूर्त (शुभ) : शाम 04 बजकर 54 मिनट से शाम 06 बजकर 27 मिनट तक।

शाम का मुहूर्त (अमृत, चर) : शाम 06 बजकर 27 मिनट से रात 09 बजकर 22 मिनट तक।

रात का मुहूर्त (लाभ) : 13 सितंबर 2019 को रात 12 बजकर 18 मिनट से रात 01 बजकर 45 मिनट तक।

ऐसे करें गणपति विसर्जन

10 दिनों की पूजा के बाद गणपति को वैसे ही विदा करना चाहिए, जैसे हम अपने किसी सगे-संबंधी या रिश्‍तेदार को यात्रा पर निकलने से पहले विदा करते हैं।

- विदा करने से पहले गणेश जी को भोग लगाएं।

- आरती करने के बाद पवित्र मंत्रों से उनका स्‍वास्तिवाचन करें।

- लकड़ी का एक पाटा या थाली लेकर उसमें स्वास्तिक बनाएं।

- अब इस पर अक्षत रखने के बाद पीला, गुलाबी या लाल रंग का वस्‍त्र बिछाएं।

- अब आपने जिस जगह पर गणपति की स्‍थापना की है, वहां से उठाकर इस पाटे पर रखें।

- गणेश जी को विराजमान करने के बाद पाटे पर फल, फूल, वस्‍त्र, दक्षिणा और मोदक रखें।

- चावल, गेहूं और पंच मेवा की पोटली बनाकर बांधें। साथ ही सिक्‍के भी रखें, ताकि यात्रा के दौरान गणपति को किसी तरह की परेशानी न हो।

- नदी या तालाब में गणपति का विसर्जन करने से पहले फिर उनकी आरती करें और प्रार्थना करें कि वह आपकी मनोकामना पूर्ण करें साथ ही 10 दिनों के पूजन में हुई गलतियों के लिए उनसे क्षमा मांगे।