कोरबा, नईदुनिया प्रतिनिधि। मान्यता के अनुसार नवरात्र में स्थापना के लिए देवी प्रतिमा बनाने के पहले चुटकी भर मिट्टी कोलकाता से नदी तट से लाई गई मिट्टी में मिलाया जाता है। कोलकाता की मिट्टी से प्रतिमा निर्माण की परंपरा पुराने कारीगरों ने शुरू की है, वह आज भी चली आ रही है।

यह कहना है कोलकाता के मूर्तिकार सुजाय पाल का, जो इन दिनों सीतामढ़ी में देवी प्रतिमा तैयार कर रहे हैं। वे पिछले 20 साल से कोरबा में आकर मूर्ति की कारीगरी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस दुकान से देवी प्रतिमा के लिए श्रृंगार मुकुट, वस्त्र, अस्त्र आदि सजावट का समान लेते हैं, वहीं से मिट्टी भी खरीदी में मिल जाती है।

शहर में कहां से मिट्टी लाते हैं यह पूछे जाने पर पाल का कहना है कि हसदेव नदी के तट से मिट्टी लाते हैं। शहर में मिट्टी की बहुत समस्या है। जिस स्थान से मिट्टी लाते थे वहां अब बेजा कब्जा हो गया है। उनका कहना है कि नदी तट से लाई गई मिट्टी से प्रतिमा के चेहरे के लिए वह चमक नहीं आ पाती, इसलिए कोलकाता से लाई गई मिट्टी से चेहरा तैयार किया जाता है।

प्रतिमा के लिए पैरा-लकड़ी कनबेरी से लाते हैं। प्रतिमा के लिए जिस तरह की बांस की आवश्यकता होती है, वह मिल नहीं पाती है जिससे कापᆬी दिक्कत होती है। सुजाय का कहना है कि प्रतिमा की भव्यता के आधार पर उस पर खर्च आती है।

ग्रीन ट्रिब्यूनल का ख्याल

मूर्तिकार सुजाय का कहना है कि वह हर साल कोरबा आते हैं, लिहाजा अधिकांश प्रतिमाएं समिति के ऑर्डर से ही बनाते हैं। उनके पास माह भर पहले से ही मूर्तियों के लिए ऑर्डर आने लगते हैं। इस बार वे मानिकपुर, ढोढ़ीपारा, रानी रोड, ढेलवाडीह सहित शहर के विभिन्न स्थानों की समितियों की ओर से स्थापित की जाने वाली प्रतिमा को तैयार कर रहे हैं। समितियों की सहमति से ग्रीन ट्रिब्यूनल का ख्याल रखते हुए मिट्टी की प्रतिमा के साथ रासायनिक की बजाय वाटर कलर का उपयोग करते हैं।

तैयार हो रहे हैं पंडाल

29 सितंबर से शुरू हो रहे नवरात्र को लेकर लोगों में उत्साह देखा जा रहा है। शहर के मंदिरों में साफ-सफाई के अलावा ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करने रसीद काटी जा रही है। समितियों की ओर से प्रतिमा स्थापित करने अलग-अलग आकृतियों में पंडाल तैयार कराए जा रहे हैं। देवी पंडालों में जहां विभिन्न मंदिरों की छवि देखने को मिलेगी, वहीं नवदुर्गा दर्शन का विशेष महत्व रहेगा। एमपी नगर, आरपी नगर, रविशंकर नगर, पुराना बस स्टैंड समेत उपनगरीय क्षेत्रों में उत्सव की तैयारी शुरू हो गई है।

महिषासुर प्रतिमा व रावण दहन पर लगे रोक

आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष केआर राज ने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि असुर राज महिषासुर आदिवासियों के पूर्वज हैं, इसलिए दुर्गा प्रतिमा के साथ महिषासुर की प्रतिमा न लगाई जाए। रावण गोंडवाना सम्राट थे। मूल निवासी प्राचीनकाल से उनको आराध्य मानकर प्रेमशक्ति के रूप में गोगों पूजा कर रहे हैं, इसलिए महिषासुर प्रतिमा व रावण दहन पर रोक लगाई जाए।

Posted By: Nai Dunia News Network