Krishna Janmashtami 2020 : श्रीकृष्ण का अर्धरात्रि को जन्म हुआ, धरा से आकाश तक "जय कन्हैया लाल की" की गूंज होने लगी। इस बार का जन्मोत्सव कुछ मायनों में अलग रहा। गंगा-यमुना के साथ ही पहली बार सरयू के पवित्र जल से प्रभु का अभिषेक किया गया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार जन्मस्थान पर श्रद्धालुओं का विहंगम समागम नहीं था। श्रद्धालुओं ने प्रभु के ऑनलाइन दर्शन कर खुद को धन्य किया। समूचे ब्रज में घर-घर आनंद छा गया। बुधवार को श्रीकृष्ण का ये 5247वां जन्मोत्सव था। सुबह से ही ब्रज में उल्लास और उमंग छाई थी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान में तो हर्ष अपरंपार था। सुबह से ही जन्मोत्सव के अनुष्ठान शुरू हो गए। मंगला आरती के बाद पुष्पाजंलि अर्पित की गई। शाम होते ही उत्सव अपने उल्लास की ओर बढ़ने लगा। रात गहराते ही मंदिर परिसर में पुष्प वर्षा की गई। सुंगधित द्रव्य का छिड़काव कराया गया। रात 11 बजे श्री गणेश जी, नवग्रह पूजन और पुष्प सहस्त्रार्चन के साथ ही लाला के जन्म की तैयारियां तेज हो गईं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास भी भागवत भवन पहुंच गए। आधी रात ठीक 12 बजे कान्हा के चलित विग्रह को मोरछल आसन पर भागवत भवन में लाया गया। रजत कमल पुष्प पर विराजमान ठाकुर जी का स्वर्ण मंडित रजत से निर्मित गाय ने दुग्धाभिषेक किया। पहली बार ठाकुर जी का अभिषेक अयोध्या से लाए गए सरयू जल से हुआ। ठाकुर जी की श्रृंगार आरती और फिर रात एक बजे शयन आरती हुई।

देहरी नमन कर लौट गए

कान्हा की इस लीला के जीवंत होते समय मंदिर प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी ही मौजूद रहे। सुबह से ही तमाम श्रद्धालु आए, मगर कोरोना संक्रमण को देखते हुए व्यवस्था के तहत उन्हें प्रवेश नहीं मिला। वे जन्मस्थान की देहरी को ही नमन कर लौट गए।

श्रद्धालुओं ने किए ऑनलाइन दर्शन

हमेशा की तरह श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर होता रहा। अपने आराध्य की लीला देखने को श्रद्धालु सुबह ही टीवी से चिपके रहे। अर्धरात्रि ठाकुर के जन्मोत्सव के ऑनलाइन दर्शन किए।

बिहारी जी की मंगला आरती

वृंदावन स्थित ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में साल में केवल एक बार ही होने वाली मंगला आरती तो हुई, मगर यहां भी श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रतिबंधित थे।

यहां 11 सितंबर को जन्मोत्सव

वृंदावन के रंगजी मंदिर में एक माह बाद 11 सितंबर को जन्मोत्सव मनेगा। सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि उत्तरभारत में केवल तिथि को ही महत्व देते हैं। दक्षिण भारत में तिथि और नक्षत्र दोनों एकसाथ होने पर ही उत्सव मनाया जाता है। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र 11 सितंबर को एक साथ हैं।

यहां भोर में मनेगी जन्माष्टमी

वृंदावन के ठा. राधारमण मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सुबह मनाई जाती है। मंदिर सेवायत पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि ठा. राधारमणलाल जू आचार्य गोपालभट्ट की साधना से प्रसन्न होकर भोर में शालिग्राम शिला से प्रकट हुए थे। इसलिए आचार्य गोपाल भट्ट ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी भी मंदिर में सुबह मनाए जाने की परंपरा डाली।

मंगला आरती में श्रद्धालु नहीं होंगे शामिल

ठाकुर बांकेबिहारी की साल में एक दिन जन्माष्टमी पर होने वाली मंगला आरती में इस बार श्रद्धालु शामिल नहीं होंगे। 12 अगस्त को रात 12 बजे ठाकुर जी का महाभिषेक होगा, लेकिन इसके दर्शन नहीं होते हैं। मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि इसके बाद रात 1.55 बजे मंगला आरती होगी, लेकिन कोरोना से बचाव के तहत केवल मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग ही रहेंगे।

नंदगांव में 11 को मनी जनमाष्‍टमी

नंदगांव के नंदबाबा मंदिर में 11 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। मंदिर के सेवायत हरिमोहन गोस्वामी कहते हैं कि नंदबाबा मंदिर में खुर गिनती (उंगलियों पर गिने जाने वाली) के हिसाब से रक्षाबंधन के आठवें दिन जन्मोत्सव मनाया जाता है।

12 को यहां भी धूमधाम से मना जन्मोत्सव

-नंदभवन, गोकुल ।

-प्रेम मंदिर वृंदावन ।

-चौरासी खंभा, महावन।

-ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर वृंदावन।

-द्वारिकाधीश मंदिर, मथुरा।

क्या है स्मार्त और वैष्णव मत

स्मार्त मत

जो स्मृतियों और वेदों को मानते हैं। पूर्ण रूप से संन्यासी हैं। स्मार्त मत से जुड़े लोग किसी भी पर्व की शुरुआत की तिथि को मानते हैं। एकादशी भी स्मार्त मत के लोग एक दिन पहले मनाते हैं।

वैष्णव मत

वह मत जिसे हमारे आचार्यों ने प्रारंभ किया है। वैष्णव मत के लोग किसी भी पर्व की सूर्योदय की तिथि को मानते हैं।

निशीथ बेला में हुआ था कृष्ण का जन्म

ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के मुताबिक द्वापर युग में भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि बुधवार को रात 12 बजे निशीथबेला में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। वैष्णव इस वर्ष 12 अगस्त को जन्माष्टमी महोत्सव मनाएंगे। सर्वार्थ सिद्धि योग व बुधवार भी है। उच्च राशि (वृषभ) के चंद्रमा हैं, निशीथ बेला में 11ः 43 बजे वृषभ लग्न भी आ जाएगी। मथुरा के पूर्व क्षितिज पर चंद्रमा का उदय रात 11ः40 बजे हो रहा है स्मार्त जन 11 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 12 अगस्त को मनाया जाएगा। परंतु, Corona के चलते श्रद्धालु इस बार अपने लाड़ले के जन्माभिषेक का टीवी चैनलों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर ही देख सकेंगे, उनको जन्मस्थान परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

Posted By: Navodit Saktawat

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