Kumbh Mela 2021 । कुंभ मेले का आयोजन इस बार तीर्थ नगरी हरिद्वार में होने वाला है। वैसे तो कुंभ मेला हर 12 में लगता है लेकिन हरिद्वार पर इस बार कुंभ मेला 11वें साल में ही आयोजित किया जा रहा है। दरअसल ज्योतिषीय गणनाओं के कारण ऐसा हो रहा है। वर्ष 2022 में बृहस्पति ग्रह कुंभ राशि में नहीं होंगे, इसलिए 11वे साल में ही कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार में किया जा रहा है। वैसे यह भी मान्यता है कि पौराणिक काल में कुंभ मेले की शुरुआत तीर्थ नगरी हरिद्वार से ही हुई थी। कई ऐतिहासिक, पुरातात्विक और पौराणिक ग्रंथों से यह साबित होता है कि हमारी सनातन संस्कृति और सभ्यता का विकास गंगा और सरस्वती नदी के किनारे ही हुआ था। बाद में इस सनातन सभ्यता का विकास सिंधु घाटी तक हो गया था।

गंगा किनारे सभ्यता का विकास

इतिहासकारों के मुताबिक जब गंगा के किनारे सभ्यता का विकास हुआ तो यहीं की सभ्यता विकसित होकर कालांतर में सिंधु घाटी तक फैल गई। बाद में उत्तर वैदिक काल में यह सभ्यता सरस्वती और सिंधु घाटी सभ्यता कहलाई। ऐसे में गंगा का द्वार कहा जाने वाला हरिद्वार सभ्यता के विकास में एक अहम स्थान रखता है।

विद्वानों का मानना है कि कुंभ पर्व जैसे महापर्व की शुरुआत हरिद्वार से ही हुई थी। दरअसल कुंभ मेला देश को एकता के सूत्र में बांधने का एक अनुपम और कालजयी अभियान रहा है। कुंभ मेला एक ऐसा महायज्ञ है, जिसके माहौल में नास्तिक भी सात्विक व सदाचारी बन जाता है।

जीवन को संयमित रखने की सीख देता है हरिद्वार कुंभ

हरिद्वार कुंभ मेला का माहौल ही लोगों में अलग चेतना को विकसित करता है। कुंभ मेला लोगों को सात्विक, सदाचारी बनने के लिए प्रेरित करता है। तीर्थ में पहुंच लोग संयम से रहना सीखें, जमिन में शयन करें, पत्तल में भोजन करें, शरीर व बुद्धि से संयमित रहने के लिए प्रेरित करता है।

Posted By: Sandeep Chourey

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