Magh Purnima 2020: माघ मास में आने वाली पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान, ध्यान और दान, पूजा -पाठ करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्व शास्त्रों में बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षमण होता है। इसलिए इस दिन गंगा के तटों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इसके साथ दूसरी पवित्र नदियों में भी लोग इस दिन स्नान कर दान-धर्म करते हैं।

शास्त्रों में किया है ऐसा महिमामंडन

पद्म पुराण में कहा गया है कि जिस व्यक्ति के पास धन की कमी है और शरीर निरोगी नहीं है, वह यदि माघ शुक्ल त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा को सूर्योदय से पहले स्नान कर दान-पुण्य कर लें तो उसको संपूर्ण माघ स्नान का फल मिल जाता है। माघ मास में सूर्योदय के पूर्व स्नान करने से देवी-देवताओं की कृपा मिलती है। पुराणों के अनुसार माघ पूर्णिमा को साक्षात विष्णु गंगाजल में विराजमान रहते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा था कि माघ पूर्णिमा का फल वैशाख और कार्तिक पूर्णिमाओं के समान ही मिलता है। इसलिए इस दिन काशी में किया गया गंगा स्नान उत्तम फल देता है। इस दिन पितृों का तर्पण करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है और पितृों को आशीर्वाद मिलता है। माघ पूर्णिमा के दिन प्रयाग में आए कल्पवासी गंगा स्नान और दान-पुण्य कर फिर से गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। ब्रह्म वैवर्त्य पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में गंगा स्नान करने से ब्रहमलोक और बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

माघ पूर्णिमा को न करें ये काम

माघ पूर्णिमा के दिन सुबह देर तक शयन नहीं करना चाहिए। इस दिन घर को स्वच्छ रखना चाहिए, साफ-सफाई करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा निकल जाती है। माघ पूर्णिमा के दिल काले कपड़ों को नहीं पहनना चाहिए। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, नहीं तो जीवन में कष्टों में इजाफा होगा। बाल काटना नाखून काटना और शैव करने की भी इस दिन मनाही है। घर के बड़े-बुजुर्गो का इस दिन अपमान करने से पितृों की नाराजगी का सामना करना पड़ता है। माघ पूर्णिमा के दिन परनिंदा करने और घर में कलह करने से लक्ष्मी नाराज होती है।

Posted By: Yogendra Sharma