उज्जैन। श्राद्ध पक्ष की अष्टमी तिथी को हाथी अष्टमी का पर्व उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु महिलाएं व्रत रखकर मां गजलक्ष्मी जी का पूजन करती हैं। उज्जैन के नईपेठ स्थित प्राचीन गजलक्ष्मी मंदिर में लक्ष्मी माता का पूजन होता है और श्रद्धालु महिलाएं माता का दूध से अभिषेक करती हैं। महिलाओं द्वारा माता को विभिन्न पकवानों का भोग भी लगाया जाता है। हाथी अष्टमी पर किया गया पूजन महिलाओं के लिए सौभाग्य देने वाला और संतान को सुख प्रदान करने वाला होता है।

अनोखा है मंदिर

विश्व में संभवत: उज्जैन में स्थित श्री गजलक्ष्मी मंदिर ही एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां माता लक्ष्मी जी सफेद हाथी पर विराजमान हैं। मां गजलक्ष्मी मंदिर में भगवान श्री हरि की एक अतिप्राचीन प्रतिमा विराजमान है, जिसमें भगवान विष्णु के समस्त अवतारों का उल्लेख किया गया है। मंदिर में माता लक्ष्मी को सफेद हाथी पर विराजमान बताया गया है। इसलिए मान्यता है कि माता यहां गजलक्ष्मी स्वरूप में विराजमान हैं।

यह है महत्व

इस मंदिर में हाथी अष्टमी पर पूजन का महत्व महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि महाभारत काल में श्राद्ध पक्ष की अष्टमी पर पांडवों की माता कुंती को व्रत करना था। मगर व्रत के दौरान जब उन्होंने मिट्टी का हाथी बनाया तो बहुत बारिश हुई। जिससे मिट्टी का हाथी गल गया।

जिसके बाद माता कुंती उदास हो गईं और भगवान से प्रार्थना करने लगीं। पांडवों ने भी देवों से निवेदन किया। इसी दौरान वहां देवराज इंद्र प्रकट हुए और उन्होंने पूजन के लिए ऐरावत हाथी माता कुंती को दे दिया। जिसके बाद माता कुंती ने विधिपूर्वक माता लक्ष्मी का पूजन किया। पूजन के बाद ऐरावत हाथी स्वर्ग में चले गए। कुंती को सुखी-संपन्न होने और संतान के सुखी रहने का आशीर्वाद मिला। कालांतर में कलयुग में भी इस व्रत को किया जाने लगा।

पीढ़ियों से होता है पूजन

मंदिर में पीढ़ियों से पूजन की परंपरा चली आ रही है। हालांकि यह मंदिर निजी स्वामित्व का है लेकिन यहां बड़े पैमाने पर श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। श्राद्ध पक्ष की अष्टमी को यहां हाथी अष्टमी का पूजन किया जाता है। इस पूजन से सुख और संपन्नता मिलती है। इस मंदिर में नवरात्र में भी श्रद्धाोलु अष्टमी के दिन पूजन करते हैं। - कांता शर्मा, पंडित प्रतिनिधि व वरिष्ठ सदस्य पुजारी परिवार