Mahananda Navami 2019: भारतभूमि को व्रत और त्यौहारों की भूमि कहा जाता है। उत्सवी माहौल से हिंदुस्तान की भूमि वर्षभर महकती रहती है। व्रत और पर्वो में देवी-देवता की पूजा का विधान रहता है इसलिए इनको संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है और परंपराओं के साथ विधि-विधान से मनाया जाता है। व्रत की इसी परंपरा में महानंदा नवमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि महानंदा नवमी का व्रत करने से सुख-समृद्धि और धन-संपदा का आशीर्वाद मिलता है और दरिद्रता का नाश होता है। महानंदा नवमी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आती है। इस बार यह तिथि 5 दिसंबर, गुरुवार को है।

महानंदा नवमी के शुभ मुहूर्त

नवमी तिथि का प्रारंभ - 5 दिसंबर को सुबह 1 बजकर 44 मिनट से

नवमी तिथि का समापन - 6 दिसंबर को सुबह 4 बजकर 15 मिनट पर

महानंदा नवमी व्रत की पूजा विधि

महानंदा नवमी तिथि को सूर्योदय के पूर्व उठ जाएं। स्नान आदि से निवृत्त होकर महानंदा नवमी के व्रत और पूजा का संकल्प लें। स्वच्छ और संभव हो तो सफेद वस्त्र पहनकर एक आसन बिछाकर स्थान ग्रहण करे। उसके बाद एक पाट पर लाल वस्त्र बिछाकर देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। महालक्ष्मी की कुमकुम, अक्षत, गुलाल, अबीर, हल्दी, मेंहदी से पूजा करें। गाय के घी का दीपक जलाएं और धूपबत्ती प्रज्वलित करें। देवी को श्वेत मिठाई, पंचामृत, पंचमेवा, ऋतुफल, मखाने, बताशे आदि को भोग लगाएं। माता की पूजा करते समय 'ओम ह्रीं महालक्ष्म्यै नम: ' मंत्र का जाप करें।

देवी लक्ष्मी के साथ श्रीयंत्र, कनकधारा यंत्र ,दक्षिणावर्ती शंख का भी पूजन करना फलदायी होता है। विधि-विधान के साथ पूजन कर गरीबों, निर्बलों और असहायों को दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि ऐसा करने से उपासक तो विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। देवी लक्ष्मी के पूजन के बाद कन्याभोज करने की भी परंपरा है। इन दिन माता लक्ष्मी के मंत्रों से हवन करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

Posted By: Yogendra Sharma