Makar Sankranti 2021 Katha: सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व मकर संक्रांति इस वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाएगा। संक्रांति इस वर्ष शौर्य के प्रतीक सिंह पर सवार होकर आएगी जबकि उपवाहन समृद्धि का प्रतीक गज रहेगा। ज्योर्तिविद शौर्य और समृद्धि के इस संयोग को खास मान रहे हैं। इसके अलावा संक्रांति का पुण्यकाल 8 घंटे 05 मिनिट रहेगा। सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश सुबह 8.15 बजे होगा। इस मौके पर पंचग्रही योग भी बनेगा। सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु, शनि मकर राशि में रहेंगे। इसके कारण राजनैतिक उथल-पुथल, भय, रोग, प्राकृतिक आपदा की स्थिति भी बन सकती है। संक्रांति से हर बार वैवाहिक आयोजन की शुरुआत होती है लेकिन इस बार सक्रांति के बाद गुरु के तारा अस्त होने से वैवाहिक आयोजन की शुरुआत नहीं होगी।

मकर संक्रांति का इतिहास

ज्योतिर्विद पं. ओम वशिष्ठ बताते हैं कि संक्रांति से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इस पर्व को मकर संक्रांति के नाम जाना जाता है। इसके अलावा महाभारत काल में भीष्म पितामाह ने अपने शरीर को त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने पर मकर संक्रांति के दिन का चयन किया था। इस दिन ही गंगाजी भागीरथ के साथ चलकर कपिल मुनि के आश्रम से सागर में जाकर मिली थीं।

मकर संक्रांति का महत्व

शास्त्रों में दक्षिणानयन को देवताओं की रात्रि और यानि नकारात्मता और उत्तरायण को देवताओं का दिन यानि सकारात्मकता का प्रतीक मना जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होते है। इस दिन जप, तप, दान आदि धार्मिक कार्यों का सौ गुणा फल प्राप्त होता है। इस मौके पर शुद्ध घी एवं कम्बल के दान से मोक्ष की प्राप्ती होती है। सक्रांति पर गंगा स्ना का विशेष महत्व बताया गया है।

Posted By: Arvind Dubey

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