Mauni Amavasya 2023: भोपाल (नवदुनिया प्रतिनिधि)। मौनी अमावस्या पर शनिवार को शनि 30 वर्षों बाद अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में प्रवेश कर रहे हैं। इस दौरान खप्पर योग, चतुर्ग्रही योग, षड़ाष्टक योग व समसप्तक योग बन रहे हैं। इसलिए इस बार की मौनी व शनिश्चरी अमावस्या खास रहेगी। इस साल की सभी 12 अमावस्या में यह एकमात्र अमावस्या है, जिसमें स्नान, दान के अलावा मौन व्रत रखने का विशेष महत्व है। इस दिन मौन रहकर जप, तप, साधना, पूजा-पाठ किए जाते हैं।

पौराणिक मान्यताओं में माघ मास की अमावस्या को दान-पुण्य करने से सभी प्रकार के कष्टों और पापों से मुक्ति मिलती है। मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु और प्रत्यक्ष देवता सूर्य की पूजा का विधान है। शनिश्चरी अमावस्या पर शहर के शनि मंदिरों में विशेष शृंगार के साथ श्रद्धालु पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिरों में कई आयोजन किए जाएंगे।

अशुभ प्रभाव को कम करने के उपाय

शनिश्चरी अमावस्या के दिन शनि मन्दिर में सरसों का तेल, तिल, जौ, काला वस्त्र, लोहा सरसों के तेल से अभिषेक कर दान करें। इस दिन गर्म ऊनी वस्त्र, काले उड़द के मंगोड़े, देशी चने यथाशक्ति दान करे। शनि मंत्र जाप कर हवन तिल, तेल युक्त सामग्री से हवन करें।

इस दिन यह करें

मौनी अमावस्या पर पवित्र तीर्थ स्थल नदी, तालाब में जाकर या गंगा जल युक्त जल से स्नान कर दान करने का विशेष विधान है। इस दिन पवित्र तीर्थ, नदी पर स्नान करने से पितृ दोष, कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही जिन राशियों पर शनि की साढ़े साती (मकर, कुंभ, मीन) और शनि की ढैया कर्क, वृश्चिक पर शुरू है, वे इस दिन शनिदेव की उपासना कर शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं।

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Posted By: Ravindra Soni

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