Navratri Kanya Pujan 2020 Muhurat and Time: शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र जारी है। आज देशभर में महाअष्टमी मनाई जा रही है। हालांति तिथि की घट बढ़ के कारण कहीं कहीं अष्टमी की पूजा शनिवार को भी होगी। इसी तरह महानवमी भी दो दिन है। इस दिन घर घर विशेष पूजा होती है और कन्याओं को भोजन करवाया जाता है। उनकी पूजा होती है। देश के बड़े हिस्से में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। पंचाग के अनुसार, इस बार अष्टमी ति​थि का प्रारंभ 23 अक्टूबर (शुक्रवार) को सुबह 06 बजकर 57 मिनट पर होगा, जो अगले दिन 24 अक्टूबर (शनिवार) को सुबह 06 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इस दिन महागौरी की पूजा की जाती है। वहीं महानवमी तिथि का प्रारंभ 24 अक्टूबर (शनिवार) को सुबह 06 बजकर 58 से होगा, जो अगले दिन 25 अक्टूबर (रविवार) को सुबह 07 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस तरह शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन या कुमारी पूजा, महाष्टमी और महानवमी दोनों ही तिथियों को किया जाएगा।

Kanya Pujan के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

महाअष्टमी और महानवमी के दिन देवी की पूजा करने के साथ ही कन्याओं की पूजा की जाती है और इसके बाद उन्हें भोजन करवाया जाता है और उपहार दिया जाता है। आमतौर पर नौ कन्याओं को भोजन करवाया जाता है। कन्याओं को गिफ्ट में कुमकुम, बिंदी और चुड़ियां दी जाती हैं।

एक सवाल यह उठता है कि कन्या किसे माना जाता। शास्त्रों में बताया गया है कि 2 वर्ष कन्या कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छः वर्ष की बालिका, सात वर्ष की चण्डिका, आठ वर्ष की शाम्भरी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलती हैं। 11 वर्ष से ऊपर की अवस्था की कन्याओं का पूजन वर्जित माना जाता है। कहा जाता है कि होम, जप, और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होती जितनी कि कन्या पूजन से होती हैं। दुःख, दरिद्रता और शत्रु नाश के लिए कन्या पूजन सर्वोत्तम माना गया है। यह कोई आवश्यक नही कि नौ कन्याओं का ही पूजन किया जाए एक कन्या का पूजन भी उतना फलदायक होता है जितनी नौ कन्याओं का।

  • अष्टमी ति​थि: 23 अक्टूबर (शुक्रवार) सुबह 06 बजकर 57 मिनट से 24 अक्टूबर (शनिवार) सुबह 06 बजकर 58 मिनट तक।
  • महानवमी तिथि: 24 अक्टूबर (शनिवार) सुबह 06 बजकर 58 से 25 अक्टूबर (रविवार) सुबह 07 बजकर 41 मिनट तक।

इस बार नवरात्र के समापन पर कोरोना के कारण भंडारों का आयोजन सीमित स्थानों पर हो रहा है। माता विराजमान कराने वाली विभिन्ना समितियों ने भंडारा न करने का निर्णय लेते हुए केवल कन्याओं को भोजन कराने का निर्णय लिया है। रविवार को नवमी पर माता का विसर्जन शुरू किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पं.गौरव उपाध्याय ने बताया कि रविवार को विजया दशमी (दशहरा) की भी तिथि है, जो अगले दिन सोमवार तक रहेगी। गौरतलब है कि दशहरा पर अस्त्र-शस्त्र, औजार, वाहन आदि का पूजन करने की मान्यता है। साथ ही दशहरा घर, जमीन, सोना-चांदी, कपड़ा, वाहन आदि सभी प्रकार की खरीदी के लिए शुभ मुहूर्त होता है।

Posted By: Arvind Dubey

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