धारचूला (पिथौरागढ़) : चीन सीमा लिपूलेख तक सड़क तैयार होने के बाद अब आदि कैलास और ओम पर्वत तक टैक्सियों के जरिए पहुंचा जा सकेगा। इस टैक्सी टूर के लिए शुक्रवार को धारचूला में आदि कैलास टैक्सी यूनियन व्यास का गठन भी हो गया है। यह तय हुआ कि इसी यूनियन की टैक्सियां इस मार्ग पर चलेंगी। टैक्सियों की दर भी तय कर दी गई हैं। एक टैक्सी में अधिकतम सात ही सवारियां ही बैठ सकेंगी। फिलहाल टैक्सियों की कोई व्यवस्था यहां नहीं थी।

शुक्रवार को धारचूला में आदि कैलास टैक्सी यूनियन का गठन किया गया। टैक्सी यूनियन का अध्यक्ष राम सिंह गब्र्याल को, महासचिव योगेश गब्र्याल, रवि गुंज्याल को कोषाध्यक्ष, धर्मेंद्र गुंज्याल और सोनी नपलच्याल को सचिव चुना गया। धीरेंद्र नबियाल और इंद्र सिंह नपलच्याल को यूनियन का संरक्षक बनाया गया है। बैठक में बताया गया कि चीन सीमा तक मार्ग पर टैक्सी संचालन करने लिए गठित यूनियन का उद्देश्य सामरिक महत्व के इस इलाके में पर्यटकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना है। इस मार्ग पर शराब पीकर टैक्सी चलाने वाले चालक को पांच सौ रुपए का जुर्माना तो देना पड़ेगा ही, वह इस मार्ग पर टैक्सी का भी संचालन नहीं कर सकेगा।

इतना निर्धारित हुआ है किराया

चीन सीमा पर आखिरी भारतीय गांव कुटी का धारचूला से किराया 1100 रुपए प्रति सवारी, गुंजी का किराया नौ सौ रुपए, गब्र्याग का किराया 800 रुपए और बूंदी का किराया पांच सौ रुपए प्रति सवारी तय किया गया है। कोरोना काल समाप्त होने और सड़क के पक्का होने के बाद किराए में संशोधन किया जा सकता है। बैठक में कोतवाल धारचूला विजेंद्र साह, दीवान सिंह पतियाल, मदन गुंज्याल, पूर्व चेयरमैन अशोक नबियाल, हीरा गब्र्याल आदि उपस्थित थे।

ऐसा है ओम पर्वत

सनातन धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार भगवान भोलेनाथ हिमालय के कैलाश मानसरोवर पर वास करते हैं। लेकिन हिमालय में ओम पर्वत का एक विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस जगह पर भी भगवान शिव का अस्तित्व रहा होगा। यह पर्वत भारत और तिब्बत की सीमा पर आज भी अस्तित्व में है इस पर्वत पर हर साल बर्फ से ओम की आकृति बनती है।

ओम पर्वत को आदि कैलाश या छोटा कैलाश भी कहा जाता है। इस पर्वत की उंचाई समुद्र तल से 6,191 मीटर (20,312 फीट) है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार हिमालय श्रृंखलाओं में कुल आठ जगह ओम की आकृति बनती है, लेकिन अभी तक केवल इसी स्थान की खोज हुई है। इस पर्वत पर बर्फ गिरने से प्राकृतिक रूप से ओम की ध्वनि उत्पन्न होती है। ओम पर्वत तक ट्रैकिंग के जरिए भी पहुंचा जा सकता है।

आदि कैलाश

समुद्रतल से 6191 मीटर की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश उत्तराखण्ड में तिब्बत सीमा के नजदीक है और देखने में यह कैलाश की प्रतिकृति ही प्रतीत होता है। आदि कैलाश को छोटा कैलाश के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्वत तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर की प्रतिकृति है। विशेष रूप से इसकी बनावट और भौगोलिक परिस्थितियां इसको कैलाश पर्वत के समकक्ष ही बनाती हैं। प्राकृतिक सुंदरता इस क्षेत्र में चारों और फैली हुई है। शहरी जीवन से ऊबे हुए लोगों को यहां आकर शांति का अहसास होता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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