मल्टीमीडिया डेस्क। भारत भूमि को त्यौहारों, पर्वों और उत्सवों की भूमि कहा जाता है। यहां पर पर्वों के कई रंग देखने को मिलते हैं। भारतवर्ष में कई परंपराओं का अक्स देखने को मिलता है। जो कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। संस्कृतियों के इस अदभुत संगम से भारतवर्ष समृद्ध और संपन्न है। त्यौहारों की इसी वृहद श्रंखला का एक पर्व है ओणम।

ओणम पर्व को केरल में फसलों को यानी प्रकृति को समर्पित किया जाता है। केरल में खेतों में लहलहा रही उपज के लिए ओणम उत्सव मनाया जाता है। समुद्रतटीय इस राज्य में इस समय काली मिर्च, चाय, अदरक, इलायची की फसल पककर तैयार होती है। इस अवसर पर केरल में कई रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें केरल की स्वच्छ और निर्मल झीलों में होने वाली नौका रेस प्रमुख है। इस नौका रेस को सर्पनौका रेस कहा जाता है, क्योंकि इसमे सुंदर तरीके से सजाई गई सर्प की आकृति वाली नौकाओं का उपयोग किया जाता है।

ओणम पर लोग फसल पकने का जश्न मनाते हैं और इस अवसर पर श्रावण देवता और फूलों के देवता की पूजा करते हैं। चारों ओर फैली हरियाली के बीच उत्साह और उमंग के साथ इस उत्सव को मनाया जाता है। उत्तर भारत में जिस तरह दशहरा मनाया जाता है उसी तरह केरल में ओणम का पर्व मनाया जाता है। दस दिनों तक लोग इस पर्व की खुशियों से सराबोर रहते हैं। इस दौरान लोग घरों को फूलों से सजाते हैं और इस पर्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसको मंदिर की बजाय घर में मनाया जाता है।

ऐसे मनाते हैं ओणम

ओणम पर हर घर में खूबसूरत, सुगंधित फूलों से आकर्षक सज्जा की जाती है। लजीज और बेहतर जायके वाले पकवान बनाकर राजा महाबलि को समर्पित किए जाते हैं। घर के सामने आकर्षक रंगोली बनाकर उसके मध्य में दीप जलाया जाता है। इस अवसर पर बनाए जाने वाले पकवानों में खीर प्रमुख है, जो विशेषतौर पर राजा महाबलि को चढ़ाई जाती है। यह खीर चावल, गुड़ और नारियल के दूध को मिलाकर बनाई जाती है। ऋतु अनुसार सब्जियां बनाई जाती है और इस अवसर पर मलयाली लोग एक-दूसरे को शुभकामना देते हैं।

Posted By: Yogendra Sharma