मल्टीमीडिया डेस्क। शास्त्रों में द्वादशी तिथि की अत्यधिक महत्व बताया गया है। शास्त्रोक्त मान्यता है कि द्वादशी तिथि का व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और भगवान श्रीहरी की कृपा उनके भक्तों पर सदा बनी रहती है। द्वादशी तिथि का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इसलिए इस दिन श्रीहरी की उपासना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

श्रीकृष्ण ने बतलाया था युधिष्ठिर को द्वादशी व्रत का माहात्म्य

द्वादशी व्रत का माहात्म्य भगवान श्रीकृष्ण नें सम्राट युधिष्ठिर को बतलाया था। इसका वर्णन महाभारत ग्रंथ के आश्वमेधिक पर्व में किया गया है। हस्तिनापुर नरेश युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि भगवन सभी व्रतों में श्रेष्‍ठ,फलदायी और कल्‍याणकारी व्रत के संबंध में बतलाइये। तब भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताते हुए कहा कि, द्वादशी का व्रत सभी तरह के व्रतों में श्रेष्ठ और कल्याणकारी है। युधिष्ठिर तुम मेरे भक्त हो इसलिए द्वादशी तिथि की जो महिमा मैने नारद को बतलाई थी वह मैं तुम्हे बतलाता हूं। श्रीकृष्ण ने कहा कि हे नरेश जो मानव स्नान आदि से निवृत्त होकर पंचमी के दिन मेरी आराधना करेगा और तीनों समय मेरी उपासना करेगा, वह संपूर्ण यज्ञों का फल प्राप्त कर अंत में मेरे परमधाम को प्राप्त करेगा। अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की द्वादशी और श्रवण-नक्षत्र ये पांच तिथियां मेरी पंचमी कहलाती हैं और ये सभी मुझे विशेष प्रिय हैं।

हर मास की द्वादशी का है विशेष महत्व

मार्गशीर्ष मास की द्वादशी तिथि को जो भक्त मेरी पूजा केशव नाम से करता है उसको अश्‍वमेध यज्ञ का फल मिलता है। पौष मास की द्वादशी को व्रत करके जो भक्त मेरी उपासना नारायण नाम से करता है वह वाजिमेध यज्ञ का फल प्रप्त करता है। माघ की द्वादशी को उपवास कर माधव नाम से जो मेरी पूजा करता है उसको राजसूय यज्ञ का फल मिलता है। फाल्गुन मास की द्वादशी का उपवास कर मेरी गोविंद नाम से पूजा करने पर अतिरात्र याग का फल मिलता है। चैत्र महीने की द्वादशी तिथि को व्रत कर विष्णु नाम से मेरी पूजा करने पर पुण्‍डरीक यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

वैशाख में करें श्रीकृष्ण की मधुसूदन नाम से पूजा

वैशाख की द्वादशी तिथि को व्रत कर मधुसूदन नाम से मेरी आराधना करने पर अग्‍निष्‍टोम यज्ञ का फल प्राप्त होता है। ज्‍येष्‍ठ मास की द्वादशी तिथि को उपवास करके त्रिविक्रम नाम से मेरी पूजा करने पर गोमेध का फल प्राप्त होता है। आषाढ़मास की द्वादशी को उपवास कर वामन नाम से मेरी पूजा करने पर नरमेधयज्ञ का फल प्राप्‍त होता है। सावन मास की द्वादशी तिथि को उपवास कर श्रीधर नाम से पूजन करने पर पंचयज्ञों का फल मिलता है। भाद्रपद मास की द्वादशी तिथि को व्रत कर हृषीकेश नाम से मेरी पूजा करने पर सौत्रामणि यज्ञ का फल मिलता है।आश्विन की द्वादशी को उपवास कर पद्मनाभ नाम से मेरी उपासना करने से एक हजार गोदान का फल मिलता है। कार्तिक महीने की द्वादशी तिथि को दामोदर नाम से पूजा करने पर संपूर्ण यज्ञों का फल प्राप्त होता है।

द्वादशी तिथि को सिर्फ उपवास करने से उपरोक्त फल का आधा भाग प्राप्त हो जाता है। युधिष्ठिर इंद्र आदि देवता द्वादशी तिथि को विधि-विधान से मेरी पूजा कर स्‍वर्गीय सुखों का उपभोग कर रहे हैं।