जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि।पुण्य सलिला मां नर्मदा की परिक्रमा अब ज्यादा सुगम होगी। इसके पीछे पुल निर्माण है। बढ़ते श्रद्धालुओं की संख्या चलते अब यहां पर बचे हुए एक और पुल का निर्माण शुरु कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार पुण्यसलिला नर्मदा की पंचकोसी परिक्रमा विराट रूप लेती जा रही है। विशेष तिथियों पर आयोजित होने वाली पंचकोसी परिक्रमा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नर्मदा पर पुल नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को अभी तक दो स्थान पर नाव से नदी पार करना पड़ती है।

पिछले साल लम्हेटाघाट में केबल स्टे ब्रिज का निर्माण शुरू हो गया है। अब सरस्वतीघाट में भी पुल का निर्माण शुरू हो गया है। इस पुल का निर्माण हो जाने से नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थित ईको पर्यटन व धार्मिक पर्यटन के स्थल एक परिपथ में जुड़ जाएंगे। नाव से नदी पार करने पर निर्भरता कम होगी। क्षेत्र में पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे। 15 किमी का फेरा कम होगा। तिलवारा पुल पार कर डगडगा हिनौता से होते हुए नर्मदा के दक्षिण तट पर नहीं जाना होगा। 26 करोड़ की लागत से साढ़े चार सौ मीटर लंबे पुल का निर्माण होना है। इसके लिए नदी के दोनों तट पर पाइलिंग का काम शुरू हो गया है। पुल का निर्माण पाइल फाउंडेशन पर होना है।

भेड़ाघाट में बढ़ेगा पर्यटन का दायरा

इससे भेड़ाघाट में पर्यटन का दायरा बढ़ जाएगा। अभी तक भेड़ाघाट आने वाले पर्यटक धुआंधार, पंचवटी देखने के साथ ही बंदरकूदनी तक नौका विहार कर ही वापस लौट जाते हैं। जबकि ऋषि जाबालि, ऋषि भृगु की तपोस्थली नर्मदा के किनारे इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में धार्मिक पर्यटन के केन्द्र स्थित हैं। सरस्वतीघाट व लम्हेटाघाट में पुल का निर्माण हो जाने से पर्यटक नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थित शनि कुंड, इंद्रगया, ब्रह्माकुंड, सूर्यकुंड, चंद्रकुंड, लक्ष्मीकुंड, गुरू कुंड, हनुमान कुंड, त्रिशूल भेद, रुद्रकुंड, बूढ़ादेव जैसे धार्मिक पर्यटन केन्द्रों तक पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही न्यू भेड़ाघाट, लम्हेटी छोर में स्थित ईको पर्यटन केन्द्र तक पर्यटकों की पहुंच आसान हो जाएगी। इस तरह अभी अधिक स्थानों का पर्यटक लुफ्त उठा सकेंगे। श्रद्धालुओं में इस खुशी देखी जा रही है।

Posted By: Rajnish Bajpai

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